सुनो गौर से नेता जी, देखो पब्लिक आती है….

सुनो गौर से नेता जी, देखो पब्लिक आती है….

2022 में होने है विधानसभा चुनाव
कोरोना काल का रिपोर्ट कार्ड हो सकता है निर्णायक
डिबाई/बुलन्दशहर।
जैसा कि सर्वविदित है कि वर्तमान में देश भर में कोरोना काल है, हर तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई है। सरकारें अपने-अपने ढंग से परिस्थितियों से निपटने में लगी हुई है, फिर भी कहीं न कहीं बहुत कुछ पीछे छूट रहा है। वजह हैं कुछ हद तक संसाधनों की कमी और काफी हद तक नेताओ एवं जिम्मेदार लोगो के खिंचे हुए हाथ। बेशक सवाल सत्ता पक्ष से ही बनते हैं, लेकिन क्या सवाल वाकई सिर्फ सत्ता पक्ष से ही बनते हैं? बिल्कुल नहीं। सवाल हर उस व्यक्ति से बनता है, जो कभी सत्ता सहयोगी तो कभी विपक्ष की भूमिका में होता है। सत्ता पक्ष के विधायक एवं सांसद बेशक अपनी विधानसभा एवं लोकसभा क्षेत्रों के प्रति उत्तरदायी हैं, लेकिन क्या वास्तव में सपा, बसपा एवं कांग्रेस जैसी पार्टियों से टिकट मांगने वाले वो नेता भी उतने ही जिम्मेदार नही हैं ? जो लम्बी-लम्बी गाडि़यों का काफिला लेकर चुनाव के दौरान जलवा बुलन्द करते नजर आते हैं। चुनाव के दौरान जिस तरह वोटों को पाने के लिये पैसा पानी की तरह बहाया जाता है तो क्या उसी तरह वोटर की जिंदगी के लिए सभी पार्टियां के नेताओं को सामने आकर प्रयास नहीं करने चाहिए? ये सच है कि डिबाई विधानसभा में सरकारी व्यवस्थाओं को सुचारू कराने के लिए केवल वर्तमान विधायक डॉ0 अनिता राजपूत ही जिम्मेदार हैं। क्या निजी स्तर पर डिबाई दोराहा, डिबाई नगर, कसेर जैसे अस्पतालों में ऑक्सीजन कॉंसंट्रेटर्स, ऑक्सीजन सिलेंडर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सेनिटाइजेशन, आवश्यक दवाओं एवं मास्क आदि की व्यवस्थाएं कराना उन नेताओं की जिम्मेदारी नही है? त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद जिस तरह से कोरोना ने ग्रामीणांचल में अपने पैर पसारे हैं, उससे निपटने के लिए न सिर्फ सत्ता बल्कि विपक्षी दलों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए लोगांे की मदद के लिए आगे आना होगा। ऐसी ही एक पहल कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष चौधरी श्यौपाल सिंह द्वारा की गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कोरोना सम्बन्धी पीडि़तों के लिए मदद स्वरूप एक लाख रुपये एवं अपनी कोठी में कोविड हॉस्पिटल के लिये जिलाधिकारी को स्वीकृति दी है। इसी क्रम में डिबाई नगर के युवाओं ने भी निजी स्तर पर एक ऑक्सीजन कॉंसंट्रेटर की व्यवस्था की है। सौरभ राठी एवं अंकित राठी नाम के दो युवाओं ने उन कथित समाज सेवियों को आइना दिखाया है, जो बड़े-बड़े फ्लेक्स पर अपना चेहरा चमकाते नजर आते हैं। इसी तर्ज पर भाजपा नेत्री सन्तोष राजपूत भी निजी स्तर पर फ्रंटलाइन वर्कर्स को सेनिटाइजर एवं मास्क बाँटते देखी गयी है, लेकिन बाकी के दलों के वो नेता ,जो अपने-अपने चुनावांे में जीत हासिल करने के लिए कई करोड़ रुपये तक खर्च कर डालते हैं। यदि सामने से आकर मदद का हाथ बढ़ाते हैं तो न सिर्फ इससे क्षेत्र की जनता की जिंदगियों को बचाया जा सकेगा ,बल्कि सभी को अपने-अपने प्रयासों के अनुसार चुनावों में भी लाभ मिल पायेगा, वरना कहीं ऐसा न हो कि साल 2022 में सम्भावित विधानसभा चुनावों में जब तमाम पार्टियों के नेता वोटों का गणित साधने हेतु क्षेत्र में उतरें तो पब्लिक उनसे ही ये पूछ बैठे कि जब हमारी जिंदगियां आपकी मदद की राह तक रही थीं ,तब आप कहाँ गायब थे जनाब ..? तब निश्चित ही उन कथित समाज सेवियों एवं कद्दावर नेताओ के पास कोई जवाब ही न हो। अतः….जागो नेता जी जागो….सुनो गौर से नेता जी, देखो पब्लिक आती है….

 238 total views,  6 views today

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *