सरकार एवं अधिकारियों को विद्युत विभाग का सीधी चेतावनी

सरकार एवं अधिकारियों को विद्युत विभाग का सीधी चेतावनी

लिखित शिकायतों एवं ज्ञापनों के बाद भी जारी है बिजली की कटौती
डिबाई/बुलन्दशहर।
पंचों की बात सर माथे, पतनाला वहीं निकलेगा… इस कहावत को चरितार्थ करने में शत प्रतिशत खरा उतरता डिबाई का विद्युत विभाग लगातार नजर आ रहा है। महीनों से जारी नगर में अघोषित विद्युत कटौती, जो अब आम जनमानस को नरकीय जीवन जीने के लिए मजबूर कर रही है। उससे अब लोगों में न सिर्फ विद्युत विभाग के प्रति बल्कि उत्तर प्रदेश की बेहद मजबूत सरकार के प्रति भी आक्रोश बढ़ रहा है। सूत्रों की मानें तो लोगों को अब यहाँ तक लगने लगा है कि विद्युत विभाग पर अब किसी का कोई नियंत्रण शेष नही है। कर्मचारियों से लेकर अधिकारी तक इतने निश्चिंत और बेखौफ हो गए हैं कि न तो अब किसी को एसडीएम का डर है और न एडीएम तथा डीएम का और ना ही शासन का।  ऐसा प्रतीत होता है कि विद्युत विभाग के एक्सईएन डिबाई से लेकर एसई बुलन्दशहर तक मानो सभी ने ये तय कर लिया है कि चाहे पब्लिक कितना भी चीखे, कितने ही व्यापारी संगठन, कितने ही समाज सेवी संस्थाएं, कितनी ही शिकायतें करें ,कितने ही ज्ञापन दें। न हम किसी की सुनेंगे और न ही हम परिस्थितियों में कोई सुधार करेंगे। इसका जीता जागता उदाहरण है डिबाई विद्युत विभाग। जिसकी शिकायतों के चलते न जाने कितनी शिकायतें एक्सईएन डिबाई से की गई। अलग-अलग व्यापार मंडलों एवं संस्थाओं ने न सिर्फ ऊर्जा मंत्री बल्कि मुख्यमंत्री तक के नाम ज्ञापन प्रेषित कर डाला। लेकिन रहे ढाक के तीन पात….
ज्ञात हो कि विगत वर्षों में डिबाई को प्रदेश का सबसे अधिक रिकवरी वाला पॉइंट घोषित किया गया था। जिसके चलते डिबाई को निर्बाध विद्युत आपूर्ति की घोषणा की गई थी। जोकि काफी समय तक मिली भी। परंतु वित्तीय वर्ष 2020-21 में डिबाई की विद्युत आपूर्ति इतनी बदहाल हो गयी कि घण्टांे-घण्टांे तपती दोपहरी में विद्युत कटौती करना, शाम लगभग 7 बजे से रात्रि 12 बजे तक के समय मे 5 से 6 बार तक लाइट बंद करना। ये आम बात हो गयी है। इस पर मजे की बात ये है कि हर बार पूछने पर भी कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कोई कारण नही बताता। बस देता है तो एक आश्वासन… की जो समस्या आपने बताई है ,उसे जल्दी ही ठीक कर लिया जाएगा। लेकिन होता वही है ,जैसा चल रहा होता है। कोई भी अधिकारी किसी भी प्रश्न का जवाब देना नही चाहता। सब एक दूसरे पर टालते है। इसकी मुख्य वजह है कि असल में किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने किसी भी विद्युत विभाग के सक्षम अधिकारी की कोई जवाबदेही तय हीं नहीं की, क्योंकि यदि ऐसा होगा तो सभी को अपनी नॉकरी जाने का खतरा होगा। जोकि फिलहाल नही है। इस सब में अधिकारी ये जानते है कि हमारा बिगड़ना ही क्या है? पब्लिक परेशान होकर सिर्फ इलेक्शन में भाजपा को वोट नही देगी तो सपा को देगी। एक सरकार जाएगी तो दूसरी आएगी। लेकिन इस सब मे त्रस्त होती है तो बस जनता। अब देखना है कि अब जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार जो निःसन्देह एक जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका में निरन्तर सफल है? क्या विद्युत विभाग के उन अधिकारियों को आइना दिखा पाएंगे? जो बेखौफ और लापरवाह रवैये से निरंतर नौकरी कर रहे है।

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