शासन-प्रशासन की लाख कोशिशों के बाबजूद भी मौतों का सिलसिला जारी

शासन-प्रशासन की लाख कोशिशों के बाबजूद भी मौतों का सिलसिला जारी

आखिर किसकी हीलाहवाली समझें?
बुलन्दशहर।
इस समय कोरोना महामारी का प्रकोप इस कदर हावी है कि जनमानस का जीना दूभर हो गया है, यहां तक कि इस कोरोना संक्रमण से जिले में प्रतिदिन 10 से 12 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। आखिर कार ये कोरोना प्रकोप कब तक समाप्त होगा?इससे एक ओर जनमानस की हांनि, दूसरी ओर लॉकडाउन से आर्थिक हांनि।जब व्यक्ति की आर्थिक हालत खराब होगी तो वह वैसे ही नहंी जी पायेगा अर्थात चहु ओर त्राहि-त्राहि मच रही है।इस महा प्रकोप को कोरोना बोले या कुछ और। इसे फ्लू बोला जाए या फेफड़ो को समाप्त करने वाला संक्रमण।यहां तक कि अब इलाज करने वाले डॉक्टर भी इसकी चपेट में आने लगे  है।अब इसका नतीजा केवल मौत, इलाज कही भी हो रहा हो कितना भी अच्छा हो, अंत में केवल मौत है। बचाव कोई करे या न करे चपेट में आने के बाद नतीजा केवल मौत।किन्तु यही हकीकत है। अधिकतर हॉस्पिटल में भर्ती होने के तीन से चार दिन में अधिक तबियत खराब हो जाना और एक हस्ते खेलते परिवार को न जाने ग्रहण लगने लगता है। यहां वे लाग अत्यंत खुशनसीब है,जिनका कोई अपना इस काल में फंसकर भी मौत से जंग जीत कर अपनांे से मिला हो अन्यथा ज्यादातर घर उजड़ ही रहे है।ऐसे काफी परिवार हैं,जहां अधिकतर बच्चे अनाथ हो गये और यहां तक कि उनकी देखभाल करने वाला भी नहंी बचा है। इसे डर कहे या बहुत गंभीर वायरस  या पुराने समय मंे होने वाली छुआछूत की तरह वाली बीमारी कहे। कहा कुछ भी जा सकता है ,किन्तु गंभीर स्थिति बनने पर नतीजा केवल मौत ही है। सरकार और प्रशासन के भरपूर प्रयासों के बाद भी महा प्रकोप रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अधिकतर इस बीमारी से जुड़े कुछ तथ्य सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। अब यह कहना उचित होगा अथवा गलत इसको चेलैंज नही किया जा सकता ,किन्तु पूरे देश में हर किसी के मोबाइल पर 5जी की टेस्टिंग के कारण बताये जा रहे हैं, जो मानव जीवन पर गहरा असर कर रहा है।साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि अब से पहले 4जी लॉन्चिंग पर काफी पक्षियों की प्रजाति ही विलुप्त हो गई थी ,किन्तु उसका असर इतना गंभीर नहीं था ,जो 5जी लॉन्चिंग का बताया जा रहा है। अब यह कितना गलत है या कितना सही ,इस विषय का फैसला देश की सरकारं और सिस्टम ही तय कर सकता है ,किन्तु आज हर कोई सरकार से इस 5जी टेस्टिंग से होने वाले भय का स्पस्टीकरण मांग रहा है। सरकार का कर्तव्य है कि इस स्थिति में देश की जनता को इसके बारे में बतायें। बाकई में 5 जी से कोई समस्या बन रही है तो देश रक्षा हित में तत्काल निर्देश टेलीकॉम कंपनियों को दिये जाने चाहिए और यदि 5जी से कोई भी समस्या नहीं बन रही तो देश की जनता को इस विषय की पूर्ण जानकारी से तत्काल अवगत कराया जाए  अन्यथा भय के कारण किसी भी परिवार को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पायेगा। हरित देश में ऑक्सीजन की मारामारी आखिर क्यों उत्पन्न हुई। बाजार में अधिकतर खाद्य पदार्थो में मिलावट, वायु में मिलावट, जल में मिलावट। आखिर इन सबके बाद भी क्या आप अपने जीवन को सुरक्षित मान रहे हैं? अर्थात यहां सब कुछ दागी हो चुका है, प्रकृति इस समय असुरक्षित हो चुकी है, इसका प्रकोप तो झेलना ही होगा।

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