लेखराज गोलीकाण्ड का हुआ पटाक्षेप, पुलिस की जांच में हत्या नहीं, स्वयं लगी गोली

लेखराज गोलीकाण्ड का हुआ पटाक्षेप, पुलिस की जांच में हत्या नहीं, स्वयं लगी गोली

एफआईआर में थे नामजद, अब हुए निर्दोष
डिबाई/बुलन्दशहर (पुनीत राजवंश)।
बीते गुरुवार से चले आ रहे चर्चित लेखराज गोलीकांड का आज गुरुवार को पटाक्षेप हो ही गया। डिबाई सीओ वन्दना शर्मा के नेतृत्व में की गई जांच के अनुसार उक्त गोली कांड के मुख्य नामजद आरोपी भाई साजिद एवं सलीम निर्दोष साबित हो ही गए। जिसके खुलासे के लिए एसएसपी बुलन्दशहर सन्तोष कुमार सिंह ने गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। जिनमंे एसएसपी बुलन्दशहर ने बताया कि मुकदमा अपराध संख्या-328/2021 मामले में की गई विवेचना एवं पूछताछ आदि से मिले साक्ष्यों के अनुसार गोली लगने की घटना स्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज में मृतक अकेला पैदल जाता नजर आ रहा है। साथ ही उसके पास कोई अन्य व्यक्ति भी दृष्टिगत नही हुआ है। साथ ही मृतक के मोबाइल से प्राप्त रिकॉर्डिंग के अनुसार मृतक ने तमंचा ग्राम निवासी एक व्यक्ति से लिया था, जिससे उसे स्वयं ही गोली लग गयी। इसी के साथ लेखराज के पुत्र ने लिखित में एक सूचना डिबाई पुलिस को दी है ,जिसमें उसने लिखा कि ऑपरेशन थियेटर में जाने से पूर्व मृतक लेखराज ने उसको बताया कि गोली लेखराज द्वारा स्वयं ही लग गयी थी। इसके अलावा जो दो नाम मृतक ने बेहोश होने से पहले बताए थे वो रंजिशन बताए थे। तो अब डिबाई सीओ के निर्देशन में की गई जांच के अनुसार इस मामले में दोनों आरोपियों को निर्दोष माना गया है, लेकिन इस सब में कुछ तथ्य ऐसे भी हैं जिनको पुलिस अनदेखा कर देना चाहती है। परंतु उन यक्ष प्रश्नों के उत्तर जो इस पूरे प्रकरण में सर उठाये हुए है ,उनकी जवाबदेही से सीओ वन्दना शर्मा एवं डिबाई पुलिस खुद को कैसे बचाएगी? उनमें सबसे अहम प्रश्न ये है कि सोशल मीडिया पर वायरल मृतक के मरने से पूर्व का वो वीडियो, जिसमे बेहोश होने से पहले मृतक ने उन दोनों आरोपियों का एवं उनके ग्राम का नाम स्पष्ट बोला है ,वो इस बात का सबूत है कि तहरीर में लिखी गयी थ्योरी और मृतक लेखराज की वीडियो का सच एक ही है, जबकि लेखराज के बेटे ने जो कहानी पुलिस को सुनाई है कि उसके पिता ने ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले उसको ये बताया कि गोली लेखराज के तमंचे से स्वयं ही चल गई थी। आखिर इसका कौन सा साक्ष्य लेखराज के बेटे ने पुलिस को उपलब्ध कराया है, जिसके आधार पर पुलिस ने तहरीर में लिखी हुयी थ्योरी और लेखराज के उस वीडियो को झूठा मानते हुए आरोपियों को मुक्त कर दिया। अब यदि पुलिस द्वारा जांच में सामने आई इस थ्योरी को सही मान भी लिया जाये तो इस मुकदमे की अहम किरदार सिम्मी द्वारा दी गयी तहरीर ,जिसमे पूरा किस्सा सिलसिलेवार तरीके से लिखा गया है, जिसके अनुसार ही उसी भाषा एवं शब्दांे को आधार मानते हुए पुलिस ने आईपीसी की धारा-307 के तहत कसेर कलां निवासी दोनों भाइयों साजिद एवं सलीम के विरुद्ध न सिर्फ तत्काल अभियोग पंजीकृत कर लिया ,बल्कि दोनों आरोपियों को हिरासत में भी ले लिया। तो अब प्रश्न ये उठता है कि यदि मृतक का बेटा सच बोल रहा है और तहरीर में नामजद दोनों आरोपी निर्दोष है तो क्या तहरीर में लिखी गयी सारी कहानी झूट थी? और यदि वादी द्वारा दी गयी तहरीर झूठी है तो फिर धारा-182 के तहत पुलिस को हत्या की झूठी जानकारी देने के लिए वादी के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत क्यों नही किया गया? इस सबके बीच उस तमंचे वाले व्यक्ति का क्या हुआ,जिससे लेखराज ने तमंचा लिया था,जहां तक कानून का सवाल है तो अभी तक तमंचे को वैध हथियार नहीं माना गया हैं तो क्या पुलिस ने उस व्यक्ति के विरूद्ध आर्म्स एक्ट मे कोई मुकदमा दर्ज किया? क्या अवैध हथियार रखने के जुर्म में पुलिस ने किसी को गिरफ्तार किया? यदि नहीं ता आखिर क्यों? जबकि मजे की बात यह कि जिस लेखराज को पुलिस किसी व्यक्ति से तमंचा लेते हुए दिखा रही है,उसके पास पहले से ही लाईसेंसी राइफल मौजूद है, तो फिर लेखराज को किसी गैर कानूनी हथियार या तमंचे की क्या जरूरत आन पड़ी। इसके अलावा गुरुवार रात्रि को ही मुकदमा अपराध संख्या-328/2021 में नामजद दोनों ही आरोपियों को डिबाई पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया था ,जिसकी पुष्टि एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र द्वारा भी की गयी थी। परन्तु मंगलवार तक थाना डिबाई में दोनों को बेैठाने की जरूरत आखिर क्या थी? जबकि विधि अनुसार हिरासत में लिए जाने पर किसी भी अपराधिक मामले में आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाना होता है। इसके बाद यदि आवश्यक हो तो रिमांड पर लेकर पूछताछ करने का प्रावधान विधि अनुसार दिया गया है। इस प्रकार के प्रश्नों से आखिर डिबाई पुलिस अपना पल्ला कैसे झाड़ेगी? क्योंकि ऐसे कितने मामले हैं जिनमें पुलिस मुकदमा दर्ज होने और आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने पहले इन्वेस्टिगेशन किया हो? ऐसे ही कुछ प्रश्नों की सुगबुगाहट धीरे-धीरे पुलिस की भूमिका को लेकर चर्चाओं का विषय बनती जा रही है। अब देखना है कि दूरदृष्टि एवं कुशल पुलिसिंग के धनी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सन्तोष कुमार सिंह के अलावा डीआईजी रेंज, आईजी, एवं अन्य उच्चाधिकारियों का नजरिया इस शैली पर कैसा रहता है?

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