रूपांतरित कोविड-19 वायरस से रहें सावधान

रूपांतरित कोविड-19 वायरस से रहें सावधान

दो गज की दूरी व मास्क है जरूरी
बुलन्दशहर। भारत सरकार और राज्यों की सरकारों द्वारा लिए जा रहे कोविड-19 वायरस के संबंध में फैसला को देखकर ऐसा लगता है कि मानो कोविड-19 वायरस रात्रि में ही एक्टिव होता है। कोरोना वायरस निशाचर हो गया है ,इसलिए एक के बाद एक राज्य कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए जिस तरह रात्रि कर्फ्यू का सहारा ले रहे हैं, उससे तो यही प्रतीत होता है कि मानो कोविड-19 का वायरस रात्रि में ही एक्टिव होता है। महाराष्ट्र ,मध्य प्रदेश ,राजस्थान ,गुजरात इत्यादि राज्यों के बाद अब दिल्ली सरकार ने भी रात में कर्फ्यू लगाने की घोषणा कर दी है। हैरानी नहीं कि जल्द ही कुछ और राज्यों में इसी रास्ते पर चलते रात्रि का कर्फ्यू लगाने की घोषणा कर दें। कुछ राज्य तो सप्ताहिक लॉकडाउन लगाने जैसे कदम भी उठा रहे हैं। ऐसा करने से क्या कोरोना वायरस संक्रमण से निजात मिलेगी, इसमें संदेह प्रतीत होता है कि उल्टे ऐसा करके समस्याएं बढ़ाने का काम कर सकते हैं। महाराष्ट्र में काम कर रहे मजदूर एक बार फिर इस आशंका से घर गये है कि कहीं उन्हें दोबारा अपने घरों को तो नहीं लौटना पड़ेगा। इस तरह की आशंकाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए और रात्रि के कर्फ्यू और सप्ताहिक कर्फ्यू या लॉकडाउन जैसे कदमों पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है ,मानो रात्रि में कोरोना वायरस का संक्रमण ज्यादा तेजी से फैलता है या सप्ताह के 2 दिन शनिवार और रविवार को कोरोना वायरस तीव्र गति से संक्रमण करता है। यदि नहीं तो फिर रात कर्फ्यू या सप्ताहिक कर्फ्यू लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। रात में ज्यादातर लोग तो अपने घरों में सोते हैं ,थोड़े बहुत लोग या तो अपने काम धंधे के सिलसिले में बाहर होते हैं या फिर अपने गंतव्य की ओर जा रहे होते हैं। यह मान लेना कि समस्या का सरलीकरण है कि लोग रात को निकल कर होटल-रेस्टोरेंट में हर आदमी पार्टी करते हैं। यदि चंद लोग ऐसा करते भी हैं तो भी जरूरत इसकी है कि ऐसे स्थानों पर सतर्कता एवं शक्ति बढ़ाई जाए ,न कि पूरे शहर या प्रांत में रात्रि का कर्फ्यू लगा दिया जाए। यह समझना बहुत जरूरी होगा कि कोरोना वायरस इस कदर बेलगाम होता जा रहा है क्योंकि भीड़भाड़ वाले स्थानों ,खासकर रेल, बस स्टेशन ,सब्जी मंडी या दैनिक सप्ताहिक बाजार ,नुमाईश आदि में लोग न तो शारीरिक दूरी बना रहे हैं और न ही इसके प्रति सचेत हैं। देखने में यह भी मिल रहा है कि लोग मास्क का भी दैनिक जीवन में प्रयोग नहीं कर रहे हैं।
हमें कोविड-19 से सावधान रहने की अत्यंत आवश्यकता ही नहीं ,बल्कि कुछ उपाय भी करने बहुत जरूरी है,जैसे हमें भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना होगा। खासकर रेल ,बस, स्टेशन, सब्जी मंडी या दैनिक या सप्ताहिक बाजारों में जाने से बचें। यदि जाना भी अत्यावश्यक हो तो सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुए मास्क का प्रयोग करें। यदि हम सावधान रहें और दूसरों को भी सावधान करने का काम करें तो कोविड-19 का संक्रमण पूरी तरह से समाप्त हो सकता है, उसके लिए जन जागरूकता कार्यक्रम चला कर जनता को जागरूक करने की आवश्यकता है। यह तभी संभव है जब सरकारें और आम नागरिक इच्छा शक्ति प्रकट करें कि हमें कोविड-19 से सावधान सतर्क रहना है। केंद्र या राज्यों की सरकारों को रात्रि का कर्फ्यू या सप्ताहिक कर्फ्यू लगाने की कतई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि वह लोगों में जन जागरूकता उत्पन्न कर दें। लोगों में इच्छाशक्ति बढ़ाने का काम करें ,यह अनावश्यक कर्फ्यू कतई न लगाया जाए ,क्योंकि इससे पूरा मानव समुदाय परेशान हो जाएगा। समस्त भारतवासियों का यह कर्तव्य बनता है कि सरकार द्वारा शुरू किए गए कोविड-19 का टीकाकरण के संबंध में सरकार का सहयोग करें। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें ,जरा सी शिकायत मिलने पर तुरंत जांच करवाएं और उपचार करें। नियमित रूप से हाथ धोएं, भीड़ भाड़ की जगहों पर दूरी बनाकर रखें और दैनिक जीवन में मास्क का प्रयोग करें, यही सावधानी कोरोना वायरस से बचाव का एकमात्र तरीका है।- सत्य प्रकाश प्राचार्य

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