रियासत को डिबाई पुलिस ने किया सट्टे में गिरफ्तार

रियासत को डिबाई पुलिस ने किया सट्टे में गिरफ्तार

सट्टे के लगभग आधा दर्जन मुकदमों में हैं नामजद
माफियाओं एवं सरपरस्तों ने हाथों हाथ करायी जमानत
जमानत मिलते ही जमकर दहाड़ा रियासत, पुलिस को दी खुलेआम चुनौती
डिबाई/बुलन्दशहर ।
ये विडम्बना ही है कि कोई व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में कोई साधारण गलती कर दे और पुलिस उसे पकड़ ले तो निश्चित ही उसको छुड़ाने सहज कोई थाने या चौकी न पहुंचे, लेकिन अगर कोई पेशेवर किसी असामाजिक कृत्य अथवा अपराध में पकड़ लिया जाए तो उसे छुड़ाने दर्जनों हमदर्द थाने और चौकियों में जमावड़ा डाल देते हैं। मामला है डिबाई नगर चौकी क्षेत्र का जहां शुक्रवार की देर शाम नगर चौकी प्रभारी रविन्द्र सिंह ने कार्यवाही करते हुए नगर के काजी खेल मोहल्ले से एक नामचीन सटोरिये को धर दबोचा। जिसके पास से मिली सामग्री से ये तस्दीक हो गया कि मोहल्ला काजी खेल निवासी रियासत सट्टे की खाई बाड़ी करता है। इसीक्रम में एसआई रविन्द्र सिंह ने अपनी पुलिस टीम को साथ लेकर रियासत पर गिरफ्तारी की कार्यवाही कर दी। पुलिस के अनुसार रियासत को मोहल्ला काजी खेल के प्राथमिक विद्यालय नम्बर 2 के पास से हिरासत में लिया गया था। ज्ञात हो कि रियासत एक पेशेवर सट्टा कारोबारी है। उसके खिलाफ पूर्व में भी डिबाई पुलिस द्वारा लगभग आधा दर्जन मुकदमे सट्टे की धाराओं में दर्ज किए गए है। लेकिन इस निर्भय कारोबारी के हौसले इतने बुलन्द हैं कि इसने हर बार अपने ये कारोबार को और विस्तृत कर लिया। जब इस विषय मे गहनता से पड़ताल की गई तो ज्ञात हुआ कि रियासत इस कारोबार का अकेला योद्धा नही है। उसके पीछे नगर के ही कुछ ऐसे कथित व्यापारियों का वृहद हस्त है ,जो व्यापारी नेता इसकी आड़ में थाने एवं चौकियों में अपनी पैंठ बरकरार बनाये रखते हैं। इसी वजह से पुलिस इनको पकड़ती बाद में है ,इससे पहले ही ये सरपरस्त इनके लिए नगर से जमानती जुटा लेते हैं। ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ कि नगर के मोहल्ला काजी खेल के रहने वाले ने रियासत की जमानत ले ली, जिससे रियासत चंद मिनटों में बाहर आ गया। मोहल्ले वालों के अनुसार बाहर आने के बाद रियासत जम कर दहाड़ा कि पुलिस मेरा क्या बिगाड़ लेगी? अब इस सब में जहां एक सवाल स्थानीय पुलिस पर बनता है कि कई कई बार एक ही अपराधिक मामले में रियासत को गिरफ्तार करने तथा मुकदमा लिखने के बाद भी यदि रियासत इस काले कारोबार को बेखौफ कर रहा है तो पुलिस ऐसे ढीठ व्यक्ति के विरुद्ध अन्य निरोधात्मक कार्यवाही करने में क्यों बच रही है, वही एक सवाल नगर वासियों पर भी बनता है कि सब कुछ जानते हुए लोग ऐसे लोगों की हिमायत में कैसे खड़े हो जाते हैं? कही ऐसा तो नही कि रियासत जैसे आदतन सटोरिये को छुड़ाने वाले और उसकी जमानत लेने वाले लोग इसी काले कारोबार में शामिल तो नही? क्योंकि यदि ऐसा है तो ये वही कहावत चरितार्थ हो रही है कि चोर का हिमायती, डाकू. ज्ञात हो कि रियासत के विषय संज्ञान लेते हुए एसएसपी बुलन्दशहर सन्तोष कुमार सिंह ने भी अपने अधीनस्थों से न सिर्फ वार्ता की है बल्कि पुलिस विभाग को भी खंगालना शुरू कर दिया है कि आखिर इस सटोरिये के तार किस-किस से जुड़े हैं। देखना है कि पुलिस और रियासत एवं इस जैसे सटोरियों के बीच की इस जंग में जीत किसकी होती है? दमदार पुलिस की!या स्टोरियों की?

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