योगी सरकार के एडीओ पर ऑक्सीजन की कालाबाजारी का आरोप

योगी सरकार के एडीओ पर ऑक्सीजन की कालाबाजारी का आरोप

एडीओ पंचायत पर 600रुपये अतिरिक्त वसूलने के है आरोप
भाजपा मण्डलाध्यक्ष द्वारा जानकारी करने पर ऑफिस छोड़ कर भागे एडीओ पंचायत
डिबाई/बुलन्दशहर।
एक ओर कोरोना की दूसरी लहर का दंश तो दूसरी ओर जिम्मेदारों द्वारा जीवनरक्षक दवाओं एवं ऑक्सीजन की कालाबाजारी, आम जनमानस को बुरी तरह तोड़ देने के लिए ऐसे ही काम कर रहा है। जैसे जख्म पर नमक..
मामला डिबाई तहसील क्षेत्र के विकास खंड पर शासन द्वारा बनाये गए ऑक्सीजन फिलिंग पॉइंट का है, जोकि डिबाई ब्लॉक के एडीओ पंचायत तेजपाल सिंह के निर्देशन में चल रहा है। मंगलवार को डिबाई ब्लॉक परिसर में उस वक्त हंगामा हो गया, जब भाजपा के नगर अध्यक्ष विकास वार्ष्णेय अपने सहयोगी नगर महामंत्री नमन राठी को लेकर डिबाई ब्लॉक स्थित ऑक्सीजन फिलिंग पर पहुंच गए। जहां पर ऑक्सीजन सिलेण्डर लेने से पहले पहुंचे डिबाई के मौहल्ला काजीखेल निवासी मोहित जिंदल पुत्र अजय जिंदल का आरोप था कि एडीओ पंचायत तेजपाल सिंह ने मोहित से उस सिलेण्डर को भरने के लिये 1100रुपये की मांग की, जिसकी कीमत सरकार द्वारा महज 500 रुपये निर्धारित की गई है। इसी बीच जब शिकायतकर्ता से इस सम्बंध में जानकारी की गई तो मोहित ने बताया कि उसकी दादी राममूर्ति देवी, विगत कई माह से कैंसर से पीडि़त हैं, जिनकी तबियत शनिवार को अचानक बिगड़ गयी। जिसके चलते डॉक्टर्स ने उसकी दादी को ऑक्सीजन लगाने की सलाह दी। जब पीडि़त ऑक्सीजन सिलेण्डर की व्यवस्था करने के लिए ब्लॉक डिबाई पर गया तो वहाँ मौजूद एडीओ पंचायत तेजपाल सिंह ने उक्त सिलेण्डर के लिए पीडि़त से 4000 से 4100 रुपये तक का खर्चा बताया, जिसमें 3000 रुपये सिलेण्डर की सिक्योरिटी, शेष धनराशि में से 500 रुपये गैस की कीमत और शेष 500 से 600 रुपये सिलेण्डर खर्चे के नाम पर बताए गए। मोहित के अनुसार वह दादी की तबियत को लेकर काफी डरा हुआ था। उसने पूरे पैसे देकर सिलेण्डर ले लिया।
गौरतलब है कि एडीओ ने उक्त के संबंध में पीडि़त को कोई रसीद नहीं दी, परन्तु जब मंगलवार को शिकायतकर्ता को पुनः गैस की आवश्यकता हुई तो पीडि़त ने उक्त एडीओ से पुनः सम्पर्क साधाा, लेकिन इस बार उसके पीछे भाजपा के डिबाई मण्डलाध्यक्ष विकास वार्ष्णेय मौके पर पहुंच गए।जब विकास वार्ष्णेय ने उक्त प्रकरण में एडीओ पंचायत से जानकारी चाही तो खुद को फंसता हुआ देख एडीओ पंचायत ने ऑफिस से निकल जाने का प्रयास किया। इसी बीच मौके पर मीडियाकर्मी भी पहुंच गए। जिसके बाद पीडि़त ने उक्त मामले की लिखित शिकायत बीडीओ आशीष पाल से की, जिस पर बीडीओ आशीष पाल ने मामले की संजीदगी को समझते हुए इस शिकायत की जांच की बात कही, साथ ही कहा कि इस प्रकरण में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उस पर संवैधानिक कार्यवाही की जाएगी। यहां स्पष्ट है कि सरकार से लेकर जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी के साथ-साथ खण्ड विकास अधिकारी कितना भी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन क्यों न करें, लेकिन कही न कही कोई न कोई एक-दो सुराख सिस्टम में जरूर मिल जाएंगे ,जो न सिर्फ सरकार बल्कि जिला एवं तहसील स्तर के अधिकारियों की न सिर्फ किरकिरी कराते है,ं बल्कि उन कर्मठ एवं साफ नीयत वाले अधिकारियों पर भी सवालियां निशान छोड़ देते हैं। देखना ये है कि इस प्रकार के संवेदनशील आरोपों पर उच्चाधिकारियों द्वारा क्या कार्यवाही की जाएगी?

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