मुख्यमंत्री की फोटो लगे बैनर को गंदगी में रखने के मामले में आया नया मोड़, कप्तान से लगाई न्याय की गुहार

मुख्यमंत्री की फोटो लगे बैनर को गंदगी में रखने के मामले में आया नया मोड़, कप्तान से लगाई न्याय की गुहार

मेरे निजी मामले से जोड़कर मुख्यमंत्री के अपमान के गुनाह से बचना चाहते है एसओ रामघाट-डिम्पल लोधी
बुलन्दशहर/डिबाई।
उत्तर प्रदेश में गुंडों एवं अपराधियों के सफाए के बाद इसमें कोई शक नही कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की इमेज आम लोगों के अलावा महिलाओं एवं बेटियों में बेशक सुपर हीरो वाली बन गयी है। जिसके चलते विगत माह में एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल एवं सी वोटर द्वारा किये गए संयुक्त सर्वे के अनुसार यूपी की वर्तमान सरकार में बतौर मुख्यमंत्री जो लोग योगी आदित्यनाथ को दुबारा देखना चाहते हैं, उनमें सर्वाधिक संख्या महिलाओं एवं बेटियों की रही है। हालांकि विगत दिवसों में संम्पन्न हुए पंचायत चुनावों में कुछ जगहों पर नामांकन एवं चुनावांे के दौरान पुलिस के समक्ष चंद छुटभैये अराजक तत्वों द्वारा महिलाओं से अभद्रता करने के मामले दृष्टिगत हुए हैं, लेकिन इसमें उन जगहों के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही को देखते हुए योगी आदित्यनाथ ने कई अधिकारियों को न सिर्फ लाइन भेजने के आदेश दिए ,बल्कि कुछेक को तो निलम्बित तक कर डाला। लेकिन इसी बीच कुछ क्षेत्रों में अभी भी ऐसे अधिकारी तैनात हैं, जो या तो अपनी लापरवाही के चलते या फिर अपनी हरकतों के कारण चर्चाओं में बने हुए हैं
ऐसा ही एक मामला डिबाई तहसील क्षेत्रांतर्गत थाना रामघाट का है, जहां का एक वीडियो अभी कुछ दिन पूर्व जमकर वायरल हुआ। जिसे एक डिम्पल नामक युवती ने बनाया, जिसमें उक्त युवती का आरोप है कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के फोटोयुक्त एक बैनर /बोर्ड को नाली के किनारे गंदगी में रखा गया था वो निश्चित ही प्रदेश के मुख्यमंत्री के सम्मान के तौर पर न सिर्फ बेहद शर्मनाक था, बल्कि मुख्यमंत्री प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने जैसा था। जिसके लिए किसी को भी माफ नहीं किया जा सकता। उक्त वीडियो में डिम्पल ने उस फ्लेक्स पर छपे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फोटो को न सिर्फ अपने दुपट्टे से साफ किया ,बल्कि उसे उठाकर एसओ रामघाट के कक्ष में रख दिया। इसके बाद उक्त वीडियो के वायरल होने का दौर शुरू होते ही मानों हड़कम्प मच गया। इसी बीच एक अनाधिकृत यू ट्यूब चैनल ने इसे आपसी लेनदेन के मामले के तौर पर प्रसारित करते हुए न सिर्फ युवती द्वारा वायरल किये गए वीडियो को प्रपंच बताया है ,बल्कि उस एसओ का सीधा-सीधा बचाव भी किया है ,जिसके कार्यकाल में मुख्यमंत्री के फोटो का अपमान करना बताया गया है। इसके बाद सोमवार की सुबह डिम्पल ने अपने भाई, मां के साथ इस मामले में एसएसपी संतोष कुमार सिंह से न्याय की गुहार लगाई है कि माना मेरे भाई का लेनदेन का कोई मामला किसी व्यक्ति से है ,जिसने हमारा लगभग एक लाख रुपये कीमत का जेनरेटर अपने पास ज़बरदस्ती रख लिया है ,जिसे उसने लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व कोरोना काल में स्कूल बंद होने पर 500 रुपये दैनिक किराए पर हमसे लिया था। अब जब हमने उससे अपना जैनरेटर वापस मंगा तो उसने देने से मना कर दिया। जिसके विषय मंे मेरे भाई ने एसओ रामघाट से शिकायत की। परन्तु जांच के नाम पर एसओ रामघाट द्वारा उस मामले को लटकाए रखा गया। इसी के साथ डिम्पल ने कहा कि यदि मेरे भाई का कोई मामला है भी तो भी आखिर किस संविधान ने सूबे के मुख्यमंत्री की तस्वीर का अपमान करने का अधिकार एसओ रामघाट को दिया है? आखिर एसओ रामघाट कैसी मानसिकता के व्यक्ति हैं ,जिनको योगी आदित्यनाथ में एक ऐसा पिता नज़र नहीं आता ,जो अपने बच्चों और प्रदेश वासियों के लिए खुद को पूर्ण सपर्पित रखते हैं। जिस तरह योगी आदित्यनाथ ने बेटियों के सम्मान एवं जीवन की रक्षा की है ,वो निश्चित है एक पिता के तौर पर निभाया गया फ़जऱ् है। वो इस प्रदेश की हर बेटी के पिता हैं और मैं अपने पिता का अपमान बर्दाश्त नही करूंगी।
गौरतलब है कि डिम्पल कोई राजनैतिक महत्वाकांक्षा की लड़की इसलिए भी प्रतीत नहीं होती ,क्योंकि प्राप्त जानकारी के अनुसार डिम्पल एक छोटा सा स्कूल संचालित कर मासूमों को शिक्षित करने का काम करती है। इस पूरे प्रकरण में एक बात तो स्पष्ट है कि माना कि डिम्पल के भाई का लेनदेन का कोई विवाद किसी से है तो पुलिस अब तक उक्त मामले को सुलझाने की बजाय इसे लटकाए क्यों पड़ी है? कही ऐसा तो नही कि डिम्पल के भाई के इस मामले को लेकर एसओ रामघाट अपनी उस लापरवाही को छुपाने का प्रयास कर रहे हों ? क्योंकि ये तो है कि चाहे ये जाने हुआ या अनजाने में ,लेकिन सूबे के मुखिया यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोटो लगा बैनर थाना परिसर में पड़ा तो लापरवाही से ही था। क्योंकि यदि उक्त बैनर/बोर्ड अपने नियत स्थान पर मजबूती से लगा हुआ होता तो डिम्पल उसे ऐसे ही हाथ में उठाकर घूमती न फिरती। तो अब देखना है कि सूबे के मुख्यमंत्री के फोटो के इस अपमान की भरपाई जिला पुलिस प्रशासन कैसे-कैसे करता है?

 826 total views,  2 views today

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *