मंजू सिंह ने जीता “टॉस“

मंजू सिंह ने जीता “टॉस“

दानपुर ब्लॉक से भाजपा प्रत्याशी बनी मंजू सिंह
जिले की सबसे महत्वपूर्ण सीट का जीता सेमीफाइनल
कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा का केंद्र थी दानपुर ब्लॉक सीट
डिबाई/बुलन्दशहर।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का आखिरी पड़ाव लगभग आ चुका है। जि़ले के सभी ब्लॉक प्रमुख पद के लिए नामांकन, नाम वापसी, मतदान एवं मत गणना की तिथि निर्धारित होते ही तमाम सीटों पर प्रत्याशियों के गुणा भाग शुरू हो गए है। लेकिन जिले की सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाली दानपुर ब्लॉक प्रमुख की सीट पर पंचायत चुनाव के पहले दिन से ही कशमकश जारी थी। क्योंकि दानपुर ब्लॉक एक ऐसी सीट है जिसमें एक सेमीफाइनल भी होना था और वो सेमीफाइनल था भाजपा समर्थित प्रत्याशी घोषित होना। यानी “टिकेट टू दानपुर“।
ज्ञात हो कि दानपुर ब्लॉक प्रमुख पद के लिए तीन क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा भाजपा समर्थित प्रत्याशी बनाये जाने का आवेदन किया गया था, जिसमें दो आवेदन वर्तमान विधायक अनिता राजपूत के बेहद करीबी माने जाने वाली भाजपा से पूर्व ब्लॉक प्रमुख दानपुर मंजू सिंह एवं उनके पति सोमवीर सिंह द्वारा किये गए थे जबकि एक आवेदन भाजपा से एटा सांसद एवं प्रदेश भाजपा में अहम कद रखने वाले राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया के करीबी आनन्द लोधी ने किया था। इस सबके बीच तीनों प्रत्याशी भाजपा का समर्थन पाने की जद्दोजहद में निरन्तर लगे हुए थे। जिस पर बुधवार को उस वक़्त विराम लग गया ,जब जिलाध्यक्ष अनिल शिशोदिया द्वारा जारी सूची के अनुसार दानपुर ब्लॉक प्रमुख पद के लिए मंजू सिंह का नाम घोषित कर दिया गया। विशेषज्ञों की मानें तो मंजू सिंह की दावेदारी प्रबल होने के मुख्यतः दो कारण माने जा रहे हैँ। पहला सत्ता पक्ष की विधायक की ताकत, दूसरा भाजपा से पदस्थ ब्लॉक प्रमुख होना। इस सबके बीच जहां एक ओर मंजू सिंह के हौसले भाजपा समर्थन पाने के चलते सातवें आसमान पर होंगे, तो वही दूसरी ओर आनन्द लोधी के लिए ये चुनाव अब प्रतिष्ठा बचाने का बन गया है। हालांकि आनंद लोधी के अनुसार ये चुनाव पहले दिन से ही मेरे समर्थकों द्वारा लड़ा जा रहा है। मैं मजबूती के साथ अपने समस्त समर्थकों के साथ गुरुवार को निर्दलीय रूप से नामांकन दाखिल करूंगा। आनंद की ये हुंकार कितनी असरदार साबित होती है ये तो भविष्य के गर्भ में छिपा है ,लेकिन इसके अलावा सूत्रों की मानें तो इस सेमी फाइनल का असर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। क्योंकि डिबाई विधानसभा का चुनावी समीकरण भाजपा बनाम अन्य होता आ रहा है। जिसके चलते कांग्रेस में अहम भूमिका अदा करने वाली अनिता राजपूत को सत्ता सुख के लिए कांग्रेस से न सिर्फ विमुख होना पड़ा बल्कि कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल होना पड़ा। अब इसे भाजपा का मजबूत किला ही कहेंगे कि महज़ चंद दिन पूर्व टिकेट पाने वाली अनिता राजपूत न सिर्फ चुनाव जीती ,बल्कि एक ऐतिहासिक वोटों का रिकार्ड स्थापित करने में कामयाब रही। हालाकिं डिबाई की राजनीति के पुरोधा राजवीर सिंह उस वक़्त अनिता राजपूत के साथ खड़े दिखे, लेकिन विगत कई मौकों पर औपचारिक मुकालात होने के अलावा अनिता राजपूत का विशेष तालमेल राजवीर सिंह के साथ दृष्टिगत नही रहा। लेकिन ब्लॉक प्रमुख दानपुर सीट पर मंजू सिंह को भाजपा का समर्थन दिलाने के मामले में जिस तरह से अनिता राजपूत ने अपनी ताकत का अहसास क्षेत्र एवं मठाधीशों को कराया है वो वाकई काबिल-ए-तारीफ ही है। सूत्रों के अनुसार मंजू सिंह का भाजपा से प्रत्याशी बनने का पूरा श्रेय कही न कही अनिता राजपूत को ही जाता है। अब देखना है कि जिस तरह से वर्तमान विधायक अनिता राजपूत ने उस्तादों को पटखनी देकर मंजू सिंह के चुनाव को एक तरफ ले जाने में कामियाबी हासिल की है तो क्या इसी गति एवं दिशा को बनाये रखते हुए विधायक 2022 में भाजपा का प्रतिनिधित्व करने में सफल हो पाती हैं या नही? क्योंकि कहीं न कहीं पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल बाबू कल्याण सिंह एवं एटा सांसद राजवीर सिंह की परम्परागत सीट माने जाने वाली डिबाई विधानसभा से प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखते हुए उनके परिवार से कोई सदस्य डिबाई सीट पर दावेदारी कर सकता है तो वहीं पूर्व विधायक राम सिंह के पुत्र रविन्द्र सिंह उर्फ डैनी, तथा नए चहरे के रूप में भाजपा में पैठ बनाती सन्तोष राजपूत की दावेदारी वर्तमान विधायक अनिता राजपूत के वर्चस्व को सीधे चुनौती देगी।

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