फिजियोथेरेपी सेंटर में किया गया गर्भपात, महिला की गई जान

फिजियोथेरेपी सेंटर में किया गया गर्भपात, महिला की गई जान

स्वास्थ विभाग की बड़ी लापरवाही बनी महिला की मौत का सबब
परिजनों ने अस्पताल पर किया हंगामा, पुलिस मौके पर
डिबाई/बुलन्दशहर।
स्वास्थ विभाग चाहे आम जनमानस की जि़ंदगी के प्रति संजीदा होने के कितने ही दावे क्यों न करे? लेकिन नगरों एवं ग्रामीणांचल में जिस तरह झोलाछाप डॉक्टर्स एवं मेडिकल सेंटर्स द्वारा जितनी भी जिंदगियां काल का ग्रास बनाई जा रही हैं, उन सबके लिए कहीं न कहीं जितना जिम्मेदार वो पैसों के लालची कथित डॉक्टर हैं, उतनी ही जि़म्मेदारी स्वास्थ विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों की भी हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण है थानाक्षेत्र डिबाई के मौहल्ला महादेव स्थित फिजियोथेरेपी सेंटर रानी अस्पताल। जहां मंगलवार को एक महिला के शव को रखकर मृतका के परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। मामले को बढ़ता देख स्थानीय लोगो ने पुलिस को सूचना दे दी, जिसके बाद पूरे सेंटर को छावनी बना लिया
परिजनों ने प्राप्त जानकारी के अनुसार थानाक्षेत्र थाना क्षेत्र डिबाई के ग्राम असदपुर घेड़ की रहने वाली लता को उसका पति हरिओम 7 जुलाई को लेकर रानी अस्पताल आया था। जहां उसे लता के गर्भवती होने की जानकारी वहां मौजूद डॉक्टरों से मिली। लता को रानी अस्पताल पर मौजूद कर्मचारियों ने 11 जुलाई तक रोज़ अस्पताल पर बुलाया। जिसके बाद वहाँ मौजूद कर्मचारियों ने लता का गर्भपात कर दिया। मृतका के थानाक्षेत्र डिबाई के ग्राम नंगला गिल्ली निवासी पिता फूल सिंह के अनुसार मेरी बेटी लता की हालत जब बिगड़ने लगी तो हमने रानी अस्पताल के कथित डॉक्टर्स को अपनी बेटी की हालत के बारे में अवगत कराया तो उन लोगों ने मुझे एवं मेरे दामाद से लता को कहीं बाहर ले जाने के लिए बोल दिया। जिसके बाद हम लता को अलीगढ़ के हैरिटेज अस्पताल ले गए। जहां की गई जांचों के आधार पर डॉक्टर्स ने हमें जानकारी दी कि लता के गर्भपात के दौरान कोई औजार लता के अंदरूनी हिस्से में लग गया है, जिसकी वजह से जो अंदरूनी रक्तस्राव हुआ,उससे पूरे शरीर में लता को गम्भीर रूप से इंफेक्शन फैल गया है। हमारी सहमति पर उन लोगों ने लता का उपचार शुरू कर दिया। एक दिन के उपचार के दौरान लता की मौत हो गयी। इसके बाद हम लता को रानी अस्पताल में वापस इसलिए लेकर आये हैं कि हम चाहते है कि जो हमारी बेटी के साथ हुआ वो और किसी के साथ न हो। अतः हम रानी अस्पताल के मालिकों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही चाहते हैं। समाचार लिखे जाने तक पुलिस अग्रिम कार्यवाही की तैयारी करती देखी गयी। परंतु इस सब के बीच एक प्रश्न सीएमओ भवतोष शंखधर से ज़रूर बनता है कि आखिर किसके आशीर्वाद से एक फिजियोथेरेपी सेंटर का बोर्ड लगाने वाला रानी अस्पताल प्रसूति एवं महिलाओं सम्बन्धी रोगों का न सिर्फ उपचार करता है ,बल्कि गर्भपात जैसे कारनामों को अंजाम देता है? आखिर क्यों? सीएमओ डॉ0 भवतोष शंखधर एवं इन जैसे अन्य सक्षम अधिकारियों ने अपनी आंखें आखिर  क्यों मूंद रखी हैं? क्या ऐसे अधिकारियों की मूक सहमति रानी अस्पताल जैसे फिजियोथेरेपी सेंटर्स के मालिकों को ऐसी हत्याओं को करने की प्रेरणा नही देती? और यदि हां तो प्रदेश के निडर एवं ईमानदार अधिकारियों में शुमार जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार, एडीएम रविन्द्र कुमार सिंह जैसे अधिकारी कब इस ओर ध्यान देंगे? ज्ञात हो कि ऐसा ही एक मामला थानाक्षेत्र डिबाई के गगन अस्पताल में अभी कुछ दिन पूर्व ही घटित हुआ था कि एक प्रसूता की मौत सिर्फ इसलिए हो गयी थी कि गगन अस्पताल ने किसी भी ग्यानेकोलॉजिस्ट की गैर मौजूदगी में उस महिला को उपचार के नाम पर घण्टांे उलझाए रखा। जबकि उस महिला के परिजन बार बार अस्पताल कर्मचारियों से अपने रोगी को बाहर ले जाने के लिए कहते रहे। लेकिन अस्पताल कर्मचारियों की हीला हवाली के चलते उक्त महिला एवं उसके अजन्मे बच्चे की भी गर्भ में ही मौत हो गई। इसकी खबर भी प्रकाशित हुई और अगले ही दिन स्थानीय चौधरी डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापेमारी भी हुई, लेकिन गगन अस्पताल को अनदेखा कर दिया गया। अब क्या करेंगे आदर्श मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और क्या करेंगे दबंग एवं स्पष्ट कार्यशैली के धनी जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार? क्योंकि जो डोली के लुटेरे वो ही डोली के संग…

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