प्राइवेट अध्यापकों के सामने गहराया रोजी-रोटी का संकट

प्राइवेट अध्यापकों के सामने गहराया रोजी-रोटी का संकट

स्याना/बुलन्दशहर। कोविड-19 महामारी की वजह से बीते डेढ़ साल से बंद पड़े प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों ने बेरोजगारी को लेकर जनसुनवाई पोर्टल पर प्रदेश के मुख्यमंत्री से सहायता राशि की मांग की है। ज्ञात है कि मार्च 2020 से कोविड-19 की वजह से सभी स्कूल पूर्ण रुप से बंद हैं। जिसके कारण सभी प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत समस्त स्टाफ प्रबंधक प्रधानाचार्य के सामने परिवार के पालन पोषण का संकट आ गया है। ज्यादातर छात्र छात्राओं के पास या उनके परिजनों के पास स्मार्ट मोबाइल उपलब्ध नहीं है ,जिसकी वजह से ज्यादातर स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं चल पा रही है और किसी भी स्कूल में पूर्ण रूप से स्कूल फीस नहीं आ रही है। जिसके कारण स्कूल कमेटी समस्त स्टाफ को वेतन देने में असमर्थ हैं, जिसकी वजह से स्कूल प्रबंधक प्रधानाचार्य एवं समस्त स्टाफ अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर पा रहा है और कर्ज एवं भुखमरी की ओर चले गए है। जो शिक्षक समाज में शिक्षा एवं जागरूकता प्रदान करता है। आज उसी शिक्षक की स्थिति इस देश में दुखद है। आपने प्रदेश में ठेले वालों को मजदूरों श्रमिकों को सहायता राशि प्रदान कराई है। लेकिन अभी तक कहीं भी प्राइवेट शिक्षकों की स्थिति के बारे में नहीं सोचा गया है। प्रदेश में आपके कार्य अत्यंत सराहनीय रहे हैं ।आशा करते हैं कि आगे भी इसी तरह आपके कार्य प्रगति पर रहेंगे। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि प्राइवेट शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार कुछ सहायता राशि प्रदान करने की कृपा करें, जिससे कि स्कूल प्रबंधक प्रधानाचार्य एवं समस्त स्टाफ अपने परिवार का पालन पोषण कर सके। इस मौके पर रणजीत सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह, मुकेश कुमार, अमरजीत सिंह, अशोक कुमार, देवेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह चौहान, तेजपाल सिंह, जयसिंह, ललित त्रिवेदी, संजय कुमार, शेर सिंह व गुड्डन कुमारी, पिंकी कुमारी, कविता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी आदि मौजूद रही।

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