पुलिस दिन भर मास्कविहीनों को करती है अनदेखा और शाम को अचानक काट देती है चालान

पुलिस दिन भर मास्कविहीनों को करती है अनदेखा और शाम को अचानक काट देती है चालान

ज्यादातर चालान कटते हैं मजदूर और मध्यम वर्ग के
बुलन्दशहर/खुर्जा।
उत्तर प्रदेश में आजकल मास्क नहीं लगाने पर चालान काटे जा रहे हैं। शुरू- शुरू में मास्क न लगाने पर सौ रूपये का जुर्माना था पर यह धीरे-धीरे बढ़कर एक हजार रुपए तक हो गया और यदि किसी व्यक्ति का दोबारा मास्क न लगाने पर पकड़ा गया तो चालान की राशि दस हजार रूपये होगी। क्या यह आम नागरिक के लिए गलत नहीं? जिस समय आम नागरिक दो रोटी के लिए संघर्ष कर रहा हो ,वही उस व्यक्ति को एक हजार रूपये के चालान से कितनी बड़ी हांनि होगी, वह भी उस समय ,जब उसके पास कोई रोजगार नहीं, मजदूरी नहीं, कोई जमा पूंजी नहीं। सरकार को कभी यह ख्याल नही आया कि उस गरीब व्यक्ति के लिए एक हजार रूपये की राशि क्या मायने रखती होगी। पुलिस प्रशासन पूरे दिन तो मास्क नहीं लगाने की छूट देता है और शाम में अचानक एक-दो घंटे के लिए सख्ती में आ जाता है, इससे कुछ लापरवाह लोग पुलिस प्रशासन के हत्थे चढ़ जाते हैं और चालान कटवा आते हैं। जिन व्यक्तियों के चालान कटे हैं ,उन व्यक्तियों से बातचीत करने पर पता चला है कि वह मुश्किल से पैसा इकट्ठा करके सामान लेने आए थे ,वह भी चालान में चले गये। सरकार ने चालान की कीमत तो ऐसे बढ़ा दी है ,जैसे घर- घर रोजगार पहुंचा दिया हो। जहां आम नागरिक दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है, नौकरी छूट गयी, कोई मजदूरी नही, वहीं उस व्यक्ति को एक हजार रूपये का चालान कितना महंगा पड़ता होगा? कभी सरकार ने सोचा है। वहीं विचारणीय तो यह कि मास्क नहीं लगाने के लिए भी पुलिस-प्रशासन ही जिम्मेदार है। आप बाजारों में देखें तो पूरा दिन 50प्रतिशत लोग बिना मास्क के घूमते नजर आएंगे और पुलिस पूरा दिन इन लोगों को अनदेखा करती है, लेकिन शाम को अचानक एक-दो घंटे के लिए बहुत सख्त हो जाती है और लाखों रुपए के चालान काट दिए जाते हैं। वह भी मध्यम और मजदूर वर्ग से जो दो रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है ,क्योंकि पुलिस रसूखदार लोगों से कुछ कहती नहीं और वही बीस-तीस परसेंट लोग उनके स्वयं के परिचित होते हैं और ले देकर उनके हत्थे चढ़ते हैं, सीधे-साधे मजदूर और मध्यम वर्ग के लोग।

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