पत्रकारों को नहीं, यूट्यूबर्स को तवज्जों दे रहे जिले के अफसर

पत्रकारों को नहीं, यूट्यूबर्स को तवज्जों दे रहे जिले के अफसर

यूट्यूब पर चैनल बनाकर अपने को पत्रकार बताने वालों की भी जिले में कमी नहीं
बुलन्दशहर।
जिले में आजकल यूट्यूब चैनल चलाना एक ट्रेंड सा बन गया है, लेकिन यूट्यूब पर अवैध तरीके से न्यूज चैनल बनाकर स्वयं को पत्रकार बताने वालों की कोई कमी नहीं है और तो और जिले के पुलिस और प्रशासनिक अफसर तक भी असली और नकली का फर्क करने में नाकाम हैं। ऐसे में चाहे प्रेसवार्ता हो या कोई अन्य कार्यक्रम, सभी में अधिकारियों द्वारा समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के रिपोर्टर्स को भी अनदेखा करते हुए यूटयूबर्स को तबज्जो दी जाती है। हाल ही में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में जहाँ एक तरफ यूट्यूब चैनल वालांे को गैर कानूनी तरीके से प्रेस पास जारी किये गए, जबकि साप्ताहिक अखबारों के पत्रकारों को पास जारी करने में आनाकानी की गयी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से पंजीकृत अखबारों से ज्यादा अहमियत अब गैरकानूनी तरीके से चल रहे यूट्यूब चैनल्स को अधिकारियों द्वारा दी जा रही है।बता दें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक यूट्यूब पर चैनल चलाने वाले लोग अपने को केवल यूट्यूबर्स कह सकते हैं ,पत्रकार नहीं और न ही प्रेस कार्ड जारी कर सकते हैं, लेकिन जिले में कानूनों की दुहाई देने वाले अफसर तक भी सही गलत का फर्क करना और रजिस्टर्ड मीडिया को तबज्जो देना मुनासिब नही समझते।

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