निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक और कर्मचारी भुखमरी के कगार पर

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक और कर्मचारी भुखमरी के कगार पर

बुधवार को विद्यालय प्रबंधक वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले काफी स्कूल संचालक और अभिवावक तहसील पहुंचे। जहां उन्होंने बताया कि मार्च 2020 से ही कक्षा एक से आठ तक के विद्यालय बंद पड़े हैं। मार्च ,2021 में महज विद्यालय 22 दिन खुले थे। सरकार द्वारा बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराये जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में ग्रामीण और निर्धन अभिभावकों के पास एंड्राइड मोबाइल नहीं हैं, जिससे उनके बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा नहीं मिल पा रही है। ऐसी स्थिति में अगर स्कूल नहीं खोले गए, तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा, क्योंकि बच्चे देश का भविष्य होते हैं, जब बच्चों का भविष्य अंधकारमय होगा तो देश का भविष्य भी अंधकारमय ही होगा। वहीं निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक और कर्मचारी भुखमरी के कगार पर हैं। उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं दी गई है। इनके साथ ही स्कूल संचालकों के परिवार की स्थिति भी विद्यालय बंद होने से ठीक नहीं है। स्कूल संचालकों और अभिभावकों ने अपनी समस्याओं और स्कूलों को खोलने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। जिसके बाद आठ सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। इसमें प्रेमपाल यादव, रमेशचंद गौतम, कौशल कुमार , अनुपम माथुर, अनिल कुमार, रामवीर सिंह चौधरी, सूरज पाल सिंह, रामकुमार आदि रहे।

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