द बार एसोसिएशन ने एसडीएम, तहसीलदार, पेशकार सहित लेखपाल पर लगाए गम्भीर आरोप

द बार एसोसिएशन ने एसडीएम, तहसीलदार, पेशकार सहित लेखपाल पर लगाए गम्भीर आरोप

एसडीएम, तहसीलदार ने आरोपों को बताया निराधार
डिबाई/बुलन्दशहर।
उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार डिबाई के खिलाफ द बार एसोसिएशन डिबाई ने मोर्चा खोल दिया है। द बार एसोसिएशन डिबाई के पदाधिकारियों ने सोमवार को तहसील परिसर स्थित बार एसोसिएशन हॉल में एक प्रैस वार्ता का आयोजन किया। जिसमें बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एसडीएम मोनिका सिंह, तहसीलदार राज कुमार भास्कर, एसडीएम पेशकार एवं डिबाई लेखपाल सतेंद्र यादव पर संगीन आरोप लगाए। सम्बंधित अधिकारियों एवं पदाधिकारियों पर आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष निरंजन सिंह राघव ने बताया कि डिबाई लेखपाल सतेंद्र यादव द्वारा दाखिल खारिज की प्रत्येक रिपोर्ट लगाने पर 1000 रुपये का सुविधा शुल्क मांगा जाता है। जो आवेदक सुविधा शुल्क नही अदा करते उनको लेखपाल द्वारा न सिर्फ चक्कर लगवाए जाते है ,बल्कि उनकी रिपोर्ट में देरी करके उनका मानसिक शोषण भी किया जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप विगत 6 माह से जो भी वाद पूर्णतः निर्विवाद हैं, उनका दाखिल खारिज भी नहीं किये गए हैं।साथ ही उन्होंने कहा कि यदि दाखिल खारिज प्रक्रिया में से लेखपाल का हस्तक्षेप खत्म कर दिया जाये तो काफी हद तक इस प्रकार के मामले निपटा लिए जायँगे। इसके बाद एसोसिएशन अध्यक्ष ने तहसीलदार राजकुमार भास्कर पर आरोप लगाया कि कार्यालय एवं डाइस पर इनकी उपलब्धता का कोई निर्धारित समय नही है। अपनी दिनचर्या के अनुसार राजकुमार भास्कर सुबह भट्टों पर निकल जाते हैं ,इसके बाद अपने लेखपालों को वहां भेजते हैं। इसी कारण से धारा 32 जैसे मामूली त्रुटि के वादों का निपटारा भी नही करते। इन्हीं आरोपों को आगे बढ़ाते हुए अध्यक्ष ने कहा कि लेखपालों को तमाम टीम वर्तमान में तहसीलदार राजकुमार भास्कर के इशारे एवं सहयोग से कार्य कर रही है। अतः ये कहना गलत नही होगा कि लेखपाल इस समय तहसीलदार की बी टीम के तौर पर कार्यरत है। इसके बाद एसोसिएशन अध्यक्ष ने एसडीएम डिबाई मोनिका सिंह को भी आरोपों के घेरे में लेते हुए एसडीएम पर न सिर्फ तहसीलदार राजकुमार भास्कर को सपोर्ट करने का आरोप लगाया। इसी के साथ निरंजन सिंह राघव ने एसडीएम के स्टाफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि धारा 151 जैसे मामलों में पेशकार द्वारा 500 से 1000 रुपये तक का सुविधा शुल्क मांगा जाता है। जिसके लिए एसडीएम ने मूक दर्शक बन कर ऐसे कर्मचारियों को लूट करने की खुली छूट दे रखी है। इसी प्रकार के आरोपों के चलते द बार एसोसिएशन डिबाई ने अनिश्चित कालीन कार्य बहिष्कार का आहवान किया। साथ ही एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि सम्बंधित अधिकारियों की कार्यशैली यथावत रहती है और अधिकारीगण ऐसे ही हठधर्मिता में बने रहते हैं तो ये कार्य बहिष्कार को आन्दोलन का रूप लेने में समय नही लगेगा। और यह आमरण अनशन तक चलेगा। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष एडवोकेट ओम प्रकाश शर्मा, एडवोकेट गेंदालाल चौधरी, एडवोकेट देवेंद्र सिंह लोधी सचिव, रामकिशोर शर्मा, कमल सिंह, नरेश चन्द्र गौड़, डीडी शर्मा, मीडिया प्रभारी गौरव अग्रवाल, राजवीर सिंह लोधी, शुभम अग्रवाल, सुरेन्द्र पाल सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
एसडीएम मोनिका सिंह उवाच
मैं सभी अधिवक्ताओं का दिल से सम्मान करती हूं, लेकिन जो आरोप लगाए गए हैं ,वो पूर्णतः निराधार हैं। मेरे द्वारा सभी अधिवक्ताओं से किसी भी वाद के लिए विधि द्वारा निर्धारित की गई प्रक्रिया के तहत कार्य करने को कहा, जो कुछ अधिवक्ताओं को नागवार गुजरा है। जहाँ तक वार्ता का सवाल है तो मेरे कार्यालय के दरवाजे न सिर्फ अधिवक्ता बन्धुओं के लिए बल्कि आम जनता के लिए सदैव खुले हैं।
तहसीलदार डिबाई राजकुमार भास्कर उवाच
मुझ पर लगाये गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। लेखपालों के हस्तक्षेप का प्रावधान विधि अनुसार दिया गया है। मेरा आम जनता से सीधा संवाद है। मेरा खुला निमंत्रण है कि यदि कोई भी लेखपाल अथवा कोई भी कार्यालय कर्मचारी किसी प्रकार की रिश्वत खोरी अथवा किसी के शोषण में शामिल है तो उसकी शिकायत मुझसे तत्काल की जा सकती है। जहां तक अधिवक्ताओं की नाराजगी का प्रश्न है तो मैंने सिर्फ विधि अनुसार कार्य करने पर जोर दिया था, जिससे कुछ लोगांे की भावनाएं आहत हुई है। मैं अपने कार्यालय में सीधे संवाद के लिए हमेशा उपलब्ध हूँ।

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