देशवासियों को हनुमान जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी

देशवासियों को हनुमान जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी

शक्ति, शौर्य और विजयगाथा के प्रतीक है महाबली हनुमान
कोरोना वॉरियर्स भी हमारे संकट मोचन
आज फिर संजीवनी बूटी की आवश्यकता-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेेश/हरिद्वार।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आज हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनायें देते हुये कहा कि आज के पावन दिवस पर हनुमान जी से ही प्रार्थना कि हे महाबली संकटमोचन हनुमान! हे प्रभु! कोरोना वायरस के प्रकोप से पीडि़त मानवता को बचाने के लिये आज फिर संजीवनी बूटी की आवश्यकता है। आप संजीवनी बूटी रूपी समाधान दीजिये पवनसुत हनुमान। हे प्रभो! मानव का अस्तित्व संकट में हैं, चारों ओर जो घट रहा है, जो दिख रहा है, ये हाहाकार, ये चीत्कार उसे देख व सुनकर मन स्तब्ध है, हृदय पीडि़त है।
स्वामी जी ने प्रार्थना की कि हे महाबली आप अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता हैं। गोस्वामी तुलसीदास लिखते है कि ‘अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता।।’ शक्ति, शौर्य और विजयगाथा के प्रतीक हैं आप। भक्ति, भाव और समर्पण का अद्भुत समन्वय हैं, इस कोरोना संकट से मानवता की रक्षा कीजिये प्रभु। वर्तमान समय में चारों ओर बिखरते समाज, पीडि़त मानवता, पृथ्वी और पर्यावरण को आज हनुमान जी जैसे जागृत, ऊर्जावान और सेवाभावी नवयुवकों की जरूरत है जो संकटमोचन बन कर आयें और समाज सेवा के प्रति समर्पित हों और दूसरों के लिये भी आदर्श बनें। स्वामी जी ने कहा कि कोरोना संकट में हमारे कोरोना वॉरियर्स पीडि़त मानवता की सेवा में रातदिन लगे हुये हैं, कोरोना वॉरियर्स ही संजीवनी बूटी प्रदान करने वाले हमारे प्यारे हनुमान जी के सेवक हैं, इन सब की सेवाभावना और निष्ठा को नमन।
आईये हम सभी मिलकर उन सबके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें ,जो इस कोरोना काल में संकटमोचन बन कर आये और बिना भेदभाव सब की सेवा करते हुये कईयों ने अपने प्राणों की आहुतियाँ तक दे दीं। उन सभी कोरोना वॉरियर्स को भी भावभीनी श्रद्धाजंलि। स्वामी जी ने कहा कि महाबली हनुमान जी अपने लिये नहीं जिये, अपने लिये, कुछ भी तो नहीं किया उन्होंने सब कुछ प्रभु के लिये तथा जो भी है वह सब भी प्रभु का इस भाव से जो किया वह भी सब प्रभु को ही समर्पित कर दिया। तेरा तुझको सौंपते क्या लागत है मोर। संकट के समय आज समाज को जरूरत है ऐसे ही विचारों की, जहां ’राम काज कीन्हें बिना, मोहि कहाँ विश्राम।’ जब तक राम काजय सेवा कार्य पूर्ण न हो विश्राम कहाँ, सुख कहाँ, चौन कहाँ। इस समय पर पीड़ा ही राम सेवा है और यही राम काज है, यही यज्ञ है, यही योग है, यही दान है और यही ध्यान है। आईये प्रभु से प्रार्थना करें प्रभो! हमारे जीवन में न अहम रहे न वहम, बस ’सेवा, समर्पण एवं त्याग से युक्त यह जीवन प्रभु को अर्पित हो और हम सब भी सादगी, सरलता और हनुमान जी जैसी उदारता के साथ समाज और समष्टि की सेवा में अपने को समर्पित करें यही तो है जीवन का सार। इसी तरह से ही हम सभी के हृदय में भी हनुमान जी का अवतरण हो। जय हनुमान।

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