दुष्कर्म के मामले में नाबालिग की हत्या कर शव को गड्डे में छिपाने की घटना में कोर्ट ने एक आरोपी को सुनाई फांसी की सजा

दुष्कर्म के मामले में नाबालिग की हत्या कर शव को गड्डे में छिपाने की घटना में कोर्ट ने एक आरोपी को सुनाई फांसी की सजा

बुलन्दशहर। दुष्कर्म के पश्चात नाबालिग की हत्या कर शव को गड्ढे में छिपाने की घटना में पुलिस द्वारा प्रभावी पैरवी किए जाने के फलस्वरुप न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला सुनाकर घटना के आरोपी को 140 दिनों में मृत्युदंड की सजा सुनाई हैं। बताया गया कि थाना अनूपशहर के ग्राम सिरोरा निवासी 12 वर्षीय लड़की खेत में काम करने के दौरान पानी पीने के लिए अभियुक्त हरेन्द्र पुत्र रामनिवास निवासी ग्राम सिरोरा थाना अनूपशहर बुलन्दशहर के घर पर गई थी, उसके पश्चात उसकी कोई जानकारी न होने पर उसके पिता द्वारा थाना अनूपशहर पर तहरीर देकर दिनांक 28/02/21 को मु0अ0सं0- 104/21 अन्तर्गत धारा-363 हरेंद्र के विरुद्ध पंजीकृत कराया गया था। काफी प्रयास के पश्चात दिनांक 02/3/21 को अभियुक्त हरेंद्र के घर से पीडि़ता का शव आंगन में गड्ढे से बरामद हुआ था। इसके उपरांत पुलिस की कई टीमों द्वारा लगातार प्रयास कर दिनांक 03/03/2021 को हरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म, हत्या के इस अपराध को बेहद गंभीरता से लेते हुए एसएसपी द्वारा सुनियोजित तरीके से क्षेत्राधिकारी डिबाई वंदना शर्मा मॉनिटरिंग सेल प्रभारी एसआई तेजपाल सिंह, कोर्ट मोहर्रिर सिपाही अजय व पैरोकार सिपाही मुकेश की एक संयुक्त टीम गठित की गई।
क्षेत्राधिकारी डिबाई के निकट पर्यवेक्षण में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक/विवेचक रामसेन सिंह द्वारा अभियोग पंजीकृत होने के 10 दिन के अंदर ठोस एवं सार्थक साक्ष्य संकलन करवा कर अभियोग में आरोप पत्र अंतर्गत धारा 302,201,376ंएबी व  5एम/6 दिनांक 09/03/21 को न्यायालय में प्रेषित कराया गया था। इसके उपरांत क्षेत्राधिकारी डिबाई सुश्री वंदना शर्मा व सहायक शासकीय अधिवक्ता सुनील कुमार शर्मा द्वारा अभियोग की न्यायालय में व्यक्तिगत रुचि लेकर प्रभावी पैरवी की गई। माह अप्रैल एवं मई में कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत न्यायालय में कार्रवाई सुचारू रूप से नहीं हो पाई ,फिर भी इनके द्वारा लगातार अथक प्रयास किए जाते रहे। एसएसपी द्वारा गठित टीम से नियमित संवाद चलता रहा, नियत तिथि पर गवाहों को प्रस्तुत कराने एवं गवाही सुनिश्चित कराने के लिए नियमित ब्रीफिंग की जाती थी। व्यक्तिगत रूप से बार-बार रिमाइंडर भेजकर समय से डीएनए रिपोर्ट मंगाकर अभियोजन की कार्यवाही सम्पन्न कराई गई ,जिसके फलस्वरुप न्यायालय द्वारा घटना होने के 140 दिन में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिनांक 15.07.2021 को न्यायालय, स्पेशल-पोक्सो, बुलन्दशहर पल्लवी अग्रवाल द्वारा अभियुक्त हरेन्द्र को दोषी पाते हुए मृत्युदंड एवं 01 लाख रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।

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