दांव पर लगी थी कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा, फिर भी हारे

दांव पर लगी थी कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा, फिर भी हारे

औरंगाबाद/बुलन्दशहर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कई दिग्गज अपनी प्रतिष्ठा को भी नही बचा सके। दिग्गज खुद चुनाव लड़ रहे थे या वो अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव लड़ा रहे थे। उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। कई प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा, जिससे उनके चेहरे लटक गए। लखावटी, अगौता और जहांगीराबाद ब्लॉक क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य के प्रत्याशियों की रविवार-सोमवार को वोटों की गिनती हुई। मतगणना के परिणाम सामने आये तो दिग्गज भी अपनी सीट नही बचा सके। जिला पंचायत के वार्ड-13 पर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक कसाना भाजपा समर्थित प्रत्याशी थे, उनको बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा, जबकि अशोक कसाना ने पत्नी कविता को बीडीसी का चुनाव लड़वाया, वह भी हार गई। खुद अशोक कासना निर्विरोध बीडीसी बने है। रालोद के पश्चिम क्षेत्र के उपाध्यक्ष योगेंद्र लोधी भी इसी वार्ड से चुनाव हार गए। खुद के गांव में वोटों का जमकर बिखराव हुआ, लेकिन पत्नी को मूढ़ी बकापुर का प्रधान बनवाने में कामयाब हो गए। वार्ड 10 पर सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सैयद हिमायत अली और पूर्व मंत्री मरहूम सईदुल हसन के पौत्र हुसैन अली सहकारी बैंक के चेयरमैन सतेंद्र शर्मा को चुनाव लड़ा रहे थे। सतेंद्र शर्मा बुरी तरह से चुनाव हार गए। बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रोशन लाल राहुल ने गांव भावसी से अपनी पत्नी सुजाता गौतम को प्रधानी का चुनाव लड़ाया। मात्र 6 वोटों से सुजाता पराजित हो गयी। भाजपा के पूर्व मंडलाध्यक्ष और पंचायत चुनाव के औरंगाबाद संयोजक फतह सिंह गुर्जर जिताका से प्रधानी लड़े, लेकिन वे अपनी जमानत भी नही बचा पाए। जिला पंचायत सदस्य जगत सिंह ने अपनी पत्नी को प्रधानी का बिहरा से चुनाव लड़ाया, इनकी भी जमानत जब्त हो गयी। पूर्व जिला पंचायत सदस्य करणवीर सिंह सिरोही ने अपनी पुत्रवधु प्रीति को रालोद के समर्थन से चुनाव लड़ाया,मगर वह भी चौथे नंबर पर रही। जिला पंचायत के वार्ड-51 पर बसपा नेता ठाकुर सुनील सिंह ने करीबी सुमन सरोज राजपूत को चुनाव लड़वाया। उनकी जमानत तक जब्त हो गयी।
मतगणना बीच मे ही छोड़कर चले गए नेताजी
मतगणना के दौरान खुद को हारा हुआ मानकर नेताजी मतगणना को बीच में ही छोड़कर चलते बने। किसी की आधी मतगणना हो चुकी थी तो किसी की अंतिम दौर में चल रही थी। इस दौरान उनके मतों में काफी अंतर था। अधिकांश ग्राम प्रधान प्रत्याशी ऐसे थे, जो 50वोटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। जिला पंचायत के प्रत्याशी भी रविवार देर शाम ही अपने घरों को चलते बने।
एक-एक वोट को लेकर अटकती रही सांसें
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सबसे ज्यादा घमासान ग्राम प्रधानी के पद पर था। जैसे-जैसे निर्णय आ रहे थे। वैसे -वैसे ही प्रत्याशियों की सांसे अटकती रही। भावसी में मात्र 5 वोटों से ही जीत हुई। पोत, खनोदा, सराय छबीला, नोबतपुर, अडोली, बकोरा, जनोरा, किशनपुर, दौलताबाद, लखावटी, चरौरा मुस्तफाबाद, अलावारहीमपुर, रजवाना ये ऐसे गांव है ,जहां मामूली अंतर से प्रधान बने है।

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