टूटा शौचालय, बदहाल व्यवस्था, न बिजली, न पानी की व्यवस्था

टूटा शौचालय, बदहाल व्यवस्था, न बिजली, न पानी की व्यवस्था

पनौड़ी के खेल स्टेडियम में सुविधाओं का टोटा
घरौंडा।
चरमराई व्यवस्थाओं और सुविधाओं के अभाव में पनौड़ी गांव का खेल स्टेडियम बदहाली के दौर से गुजर रहा है। स्टेडियम में न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही शौचालय की। न लाइट है और न ही बिजली की कोई व्यवस्था। ऑपन एयर जिम भी खस्ताहाल में है। स्टेडियम में जगह-जगह पर कांग्रेस घास खड़ी हुई है। पंचायत समय-समय पर स्टेडियम की व्यवस्थाएं दुरूस्त करने का दावा जरूर करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है। पनौड़ी गांव से करीब एक किलोमीटर दूर युवा प्रतिभाओं के लिए लगभग अढाई साल पहले एक स्टेडियम का निर्माण करवाया गया, जिस पर करीबन 30 लाख से ज्यादा की राशि खर्च की गई, लेकिन अढाई साल बाद भी इस स्टेडियम का निर्माण कार्य अधर में लटका पड़ा है। स्टेडियम की सिर्फ तीन दीवारी ही हुई है, एक दीवार का काम अटका हुआ है। दीवार न होने से पशु स्टेडियम के अंदर घुस जाते है। गांव के युवा खिलाडियों रामनिवास, रेनुभूषण, संदीप कुमार, अशोक कुमार, शिवा, मनदीप व अन्य का कहना है कि जिस जोरदार तरीके से व्यायामशाला का उद्घाटन हुआ था, बाद में इसे स्टेडियम में तबदील किया गया था। उससे प्रतीक होता था कि उनको हर तरह की सुविधाएं यहां मिल पाएगी, लेकिन सरकार के दावे हकीकत से कोसों दूर है।

न सफाई और न ही सुविधा
युवा खिलाड़ी संदीप कुमार का कहना है कि सरकार खेल स्टेडियमों का निर्माण तो कर देती है, लेकिन पंचायतों की लापरवाही के कारण स्टेडियम अपना वजूद ही खो देते है। पनौड़ी गांव में करीब छः एकड़ में व्यायामशाला कम खेल स्टेडियम बनाया गया है। स्टेडियम बनने के बाद यहां ना तो कोई सफाई हुई और ना ही पीने के पानी जैसी सुविधाएं मुहैया करवाई गई।
खुद ही करनी पड़ती है ट्रेक की सफाई
ग्रामीण रेनू भुषण का कहना है कि स्टेडियम में बड़ी-बड़ी घास खड़ी है और रंनिग ट्रैक भी कंकर पत्थर से भरा पड़ा है। जिस किसी को भी दौड़ लगानी होती है या खेलना होता है ,वह उस हिस्से की खुद ही सफाई कर लेता है। पानी के लिए पंप तो लगाया गया है लेकिन वह भी बेकार है।
जंग खा गया ऑपन एयर जिम
खिलाड़ी अशोक कुमार का कहना है कि ऑपन एयर जिम जंग खा रहे है। चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है। इस स्टेडियम में अच्छी घास व हरियाली को बढ़ाने वाले पेड़ पौधे लगाए जाने थे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सुविधाओं और व्यवस्थाओं के अभाव के कारण लोग यहां आने से कतराने लगे है। पंचायत सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति करती है।
टूटा पड़ा है शौचालय
खिलाड़ी शिवा का कहना है कि शौचालय टूट चुका है। लघुशंका के लिए खिलाडियों को खुले में ही जाना पड़ता है। पानी की व्यवस्था नहीं है, लिहाजा घर से ही पानी की बोतले भरकर लानी पड़ती है। समस्याएं है लेकिन समाधान नहीं है।
व्यायामशाला को स्टेडियम में तब्दील कर दिया गया था। उसके बाद से कोई ग्रांट नहीं आई है। चारदीवारी व सीढियों का काम भी अटका हुआ है। पंचायत समय-समय पर साफ-सफाई करवाती रहती है। चारदीवारी, इंडोर जिम व सीढियों के निर्माण कार्य को लेकर विधायक जी को भी लिखा गया है।-मनिंद्र सिंह, सरपंच प्रतिनिधि पनौड़ी

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