जिस स्थान पर हमारे इष्ट और गुरु का सम्मान न हो ,वहां नहीं जाना चाहिए- व्यास सूरदास

जिस स्थान पर हमारे इष्ट और गुरु का सम्मान न हो ,वहां नहीं जाना चाहिए- व्यास सूरदास

बुलन्दशहर/खुर्जा। बुधवार को कथा सुनाते हुए व्यास सूरदास ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिसमें जहां आप जा रहे है। वहां आपका अपने इष्ट और अपने गुरु का अपमान ना हो। यदि ऐसा होने की आशंका है, तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो। उन्होंने सती चरित्र का प्रसंग सुनाया और कहा कि सती ने भगवान शिव की बात नहीं मानी। जिस पर उन्हें खुद को अग्नि में स्वाह होना पड़ा। उन्होंने कहा कि भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है। उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने भजन भी सुनाए। जिन्हें सुनकर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। कथा में अनुज राजपूत, संजय सिंह, श्रीचंद नादान, रविंद्र लालू, कुंवरपाल, लाला, दुलारी, भरत सिंह, प्रवेश, ऊषा, राखी, धीरू, रेखा आदि रहे।

 20 total views,  2 views today

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *