जिलाधिकारी ने नीम नदी के किनारे पीपल एवं पापड़ के पौधा रोपते हुए कार्यक्रम का किया शुभारम्भ

जिलाधिकारी ने नीम नदी के किनारे पीपल एवं पापड़ के पौधा रोपते हुए कार्यक्रम का किया शुभारम्भ

पौधा रोपकर नया बांस में नीम नदी का किया गया पुनर्जीवन एवं जीर्णोद्वार
बुलन्दशहर।
तहसील स्याना अन्तर्गत गांव नया बांस में नीम नदी के पुनर्जीवन एवं जीर्णोद्वार के लिए जिला प्रशासन एवं नीर फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यातिथि जिलाधिकारी रविन्द्र ने नीम नदी के किनारे पीपल एवं पाकड़ का पौधा रोपते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपस्थितजनों द्वारा भी नदी के किनारे पौधारोपण किया गया। नीम नदी के पुनर्जीवन एवं जीर्णोद्वार में जिलाधिकारी एवं अधिकारियों तथा उपस्थित सामान्य द्वारा नदी की भूमि में खुदाई कार्य करते हुए श्रमदान भी किया गया। इस अवसर पर नीम नदी के पुनर्जीवन हेतु स्थानीय निवासियों से भी श्रमदान करते हुए नदी का जीर्णोद्वार करने की अपील की गई।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि नीम नदी जिस प्रकार से पूर्व के वर्षो में कल-कल करती हुई बहती थी, उसी प्रकार से आज के समय में नदी को बहने के लिए उसको पुनर्जीवित किया जाना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नीम नदी का उद्गम हापुड़ जनपद के गांव दतियाना से होते हुए जनपद बुलन्दशहर में लगभग 94 किमी0 की लंबाई में तहसील स्याना, अनूपशहर एवं डिबाई से गुजरते हुए जनपद कासगंज में काली नदी में जाकर मिलती है। गंगा की सहायक नदियों को साफ किया जाना अति आवश्यक है ,जिससे गंगा में स्वच्छ जल जाए, इसके लिए नीर फाउन्डेशन द्वारा नदियों के लिए किये जा रहे जीर्णोद्वार कार्य की सराहना की गई। नीम नदी के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए वर्षा से पूर्व नदी का चौड़ीकरण/सौन्दर्यकरण कार्य कराया जाये ,जिससे जल का प्रवाह निर्बाध रूप से बहें।
उप जिलाधिकारी स्याना को निर्देशित किया गया कि नीम नदी की भूमि की खतौनी के आधार पर पैमाइश कराते हुए पटरी का चिन्हांकन करते हुए अवैध कब्जों को हटवाया जाये। साथ ही बीडीओ को निर्देशित किया गया कि नीम नदी के दोनों किनारों की पटरी पर मनरेगा के अन्तर्गत ट्रेंच खुदाई एवं पौधारोपण का कार्य कराते हुए नदी की भूमि को सुरक्षित किया जाये। नदी किनारे के गांव में जनजागरूकता अभियान चलाते हुए नदी के जल को स्वच्छ एवं अविरल बनाये रखने के लिए इसमें कूड़ा-करकट, पॉलिथिन एवं गंदे पानी को न डाले जाने के लिए जागरूक किया जाये। नदी के आस-पास खेती करने वाले किसानों से भी अपील की गई कि नदी किनारे बाग लगाये जाने तथा जैविक खेती करते हुए लेमनग्रास, खस, बांस, सहजन, हल्दी की फसलों को उगाये जाने से आय दुगुनी होने के साथ ही पानी का वाटर रिचार्ज भी होगा। नदी किनारे फलदार पेड़ लगाये जाने से फल भी प्राप्त होंगे तथा वाटर रिचार्ज होने से पानी की भी कोई समस्या नहीं रहेगी। वाटर रिचार्ज के लिए नदी पर चैक डैम बनाने, नदी किनारे गांवों में तालाबों का जीर्णोद्वार करने के कार्यो को कराया जाये। जिलाधिकारी द्वारा नदी एवं जल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उसके प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभों के बारे में भी विस्तृत रूप से जानकारी दी गई।
मंगलवार को जिलाधिकारी द्वारा नीम नदी के पूर्णोद्धार के लिए किये गये प्रयासों को सतत रूप से आगे बढ़ाये जाने के लिए जिला स्तरीय, तहसील स्तरीय एवं ग्राम स्तरीय समिति का गठन किये जाने के निर्देश दिये गये। जो इस प्रकार है-जिला स्तरीय समिति  में जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी सदस्य सचिव एवं अपर जिलाधिकारी प्रशासन, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई/नोडल अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, डीएफओ, भूमि संरक्षण अधिकारी एवं डीसी मनरेगा सदस्य होंगे। तहसील स्तरीय समिति में उप जिलाधिकारी अध्यक्ष तथा बीडीओ, क्षेत्रीय अधिशासी अभियन्ता सिंचाई, वन क्षेत्राधिकारी, एडीओ कृषि, स्वयं सेवी संस्था जोकि जल संरक्षण एवं पौधारोपण कार्य करती हैं,सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।ग्राम स्तरीय समिति में ग्राम प्रधान, लेखपाल, ग्राम सचिव सम्मिलित होंगे। गठित समितियों द्वारा नीम नदी के पूर्णोद्धार का कार्य प्रभावी रूप से कराया जायेगा। कार्यक्रम में सीडीओ अभिषेक पाण्डेय, डीडीओ एस0पी0 मिश्र, डीएफओ सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं नीर फाउन्डेशन के रमन त्यागी, प्रगतिशील किसान/पद्यश्री भारत भूषण त्यागी उपस्थित रहे।

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