चौधरी डाइग्नोस्टिक सेंटर पर एसीएमओ ने की छापेमारी

चौधरी डाइग्नोस्टिक सेंटर पर एसीएमओ ने की छापेमारी

केंद्र संचालक सहित सेंटर पर लगा हुआ बोर्ड भी हुआ गायब
मिल रही शिकायतों पर की गई कार्यवाही-एसीएमओ
डिबाई/बुलन्दशहर (पुनीत राजवंश)।
कोरोना काल मे जहां एक ओर डॉक्टरों ने अपने सेवा धर्म का बखूबी से पालन किया है तो वही दूसरी ओर इस पेशे को बदनाम करने वाले कथित सौदागरों ने लोगांे की जिंदगियों के साथ जमकर व्यापार किया है और जम कर आम जनमानस को लूटा है। किसी ने अधिक वसूली करके तो किसी ने मानकों को ताक पर रखकर अपनी दुकानों को चलाकर।
ऐसा ही कुछ मामला उस वक्त सामने आया जब शुक्रवार को बुलन्दशहर से आये एसीएमओ डॉ ए0के0 भंडारी ने डिबाई नगर में चल रहे चौधरी डाइग्नोस्टिक सेंटर पर अचानक छापेमारी कर दी। लेकिन मजे की बात ये रही कि जब तक डॉ0 भंडारी डिबाई पहुंचते ही उससे पहले उनके यहाँ आने की खबर डिबाई पहुंच गई। नतीजा वही जो आम तौर पर अधिकतर विभागीय छापेमारी में होता है। सारे पंछी फुर्र… अर्थात जो चौधरी डाइग्नोस्टिक सेंटर का बोर्ड उनकी उस दुकान यानी कि कथित सेंटर की शोभा गुरुवार शाम तक बढ़ा रहा था वो महज कुछ घण्टांे में यानी शुक्रवार सुबह होते होते गायब हो गया। इतना ही नही सेंटर मालिक लैब टेक्नीशियन सहित तमाम नुमाइंदे भी उड़नछू हो चुके थे। घण्टांे एसीएमओ भंडारी शिकार की राह तकते रहे। सेंटर संचालक को लगातार कॉल पर कॉल की गई ,परन्तु जिसे नहीं आना था वो नही आया और प्राप्त जानकारी के अनुसार सेंटर सील होने की पुष्टि नही हो सकी।
इसी के साथ एक सवालिया निशान सीएमओ बुलन्दशहर पर भी लगता है कि जब एक समाचार पत्र को दिये गये इंटरव्यू में डॉ0 भवतोष शंखधर ने कहा है कि महानिदेशक स्वास्थ्य के आदेश पर डिबाई में संचालित चौधरी डाइग्नोस्टिक सेंटर को बंद करा दिया गया है तो फिर शुक्रवार को डॉ ए0के0 भंडारी द्वारा की गई छापेमारी आखिर क्या थी? क्या ये छापेमारी एसीएमओ भंडारी द्वारा औचक की गई थी? यदि हां तो फिर कैसे रातों रात चौधरी डाइग्नोस्टिक सेंटर का बोर्ड गायब हो गया। और साथ ही उक्त सेंटर के संचालक भी अंतर्ध्यान हो गए वो भी उस समय जब सेंटर में 3 से 4 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने के लिए घण्टो संचालको का इंतजार कर रहे थे। आखिर ये कैसी औचक छापेमारी थी? और यदि ये छापेमारी औचक न हो कर पूर्व नियोजित थी तो फिर ऐसी कार्यवाही करके विभाग और अधिकारी किसको मूर्ख बनाते हैं? आखिर क्यों इस प्रकार की कार्यवाहियों की जानकारी पहले से ही आरोपियों को मिल जाती हैं? इस प्रकार की कार्यवाही से जनता भले ही बेवकूफ बन जाये ,लेकिन ये निश्चित है कि जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार जैसे दृढ़ एवं ईमानदार छवि के अधिकारियों की समझ मे सब आता है। अब देखना है कि जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार जैसे अधिकारी कब न सिर्फ उन लोगो पर कार्यवाही करते हैं ,जो गलत अथवा फर्जी तरीके से स्वास्थ्य सम्बन्धी दुकान चला रहे हैं ,बल्कि वो लोग भी शिकंजे में कसे जाएंगे ,जो इन मौत के सौदागरों के साथ मिलीभगत करके इनको विभागीय कार्यवाहियों की जानकारी साझा कर देते हैं।

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