गगन अस्पताल पर लगाया जिंदगी लेने का आरोप

गगन अस्पताल पर लगाया जिंदगी लेने का आरोप

गर्भवती महिला एवं गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत
स्थानीय पुलिस ने गुस्साए परिजनों से अस्पताल को बचाया
डॉक्टर्स सहित समस्त स्टाफ हुआ गायब
डिबाई/बुलन्दशहर।
जहां एक ओर डॉक्टर्स ने इस कोरोना काल मे एक मसीहा का काम किया है तो वही कुछ अस्पतालों ने गरीब एवं असहाय मरीजों का जमकर खून चूसा है। जिसके चलते आम जनमानस में आक्रोश बढ़ा है। ऐसा ही एक मामला डिबाई नगर में कोतवाली के सामने बने गगन अस्पताल में उस वक्त देखने को मिला ,जब डिबाई नगर के मोहल्ला हँसियागंज निवासी नगीना नामक महिला को बुधवार की देर शाम उसके परिजन गगन अस्पताल पहुंचे।जहां उपचार के दौरान उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी। मौत की जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो उठे। लेकिन अस्पताल के ठीक सामने कोतवाली होने की वजह से तत्काल पुलिस ने आकर मामले को संभाल लिया। गौरतलब है कि इसके बीच गगन अस्पताल के सभी डॉक्टर्स एवं कर्मचारी भाग खड़े हुए। मृतका के पति फरीद एवं उसके साथ मौजूद गुलशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहल्ला हँसिया गंज निवासी नगीना जो गर्भवती थी। बुधवार को उसकी स्थिति बिगड़ने के चलते परिजन उसे डिबाई के गगन अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के अनुसार अस्पताल की बनावट और आकर्षण को देख कर हमें लगा कि ये बड़ा अस्पताल है तो हमारे मरीज को बढि़या इलाज मिल जाएगा। इसी के चलते हम अपने मरीज को लेकर गगन अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि हमने वहां मौजूद डॉक्टर्स से कहा कि यदि आप हमारे मरीज की तकलीफ को समझ पा रहे हो ,तभी आप हमारे मरीज का इलाज करें, वरना हम अपने मरीज को अलीगढ़ ले जायंेगेे, लेकिन वो लोग हमंे घण्टों बेवकूफ बनाते रहे तथा हमसे पैसे ऐंठते रहे। जब हमारे मरीज की मौत हो गयी तो उन्होंने हमें अपने मरीज को बाहर ले जाने के लिए बोल दिया।हमारे मरीज और गर्भस्थ शिशु की जान गगन अस्पताल के डॉक्टर्स एवं स्टाफ ने ली है। मामले को तूल पकड़ता देख स्थानीय पुलिस ने आकर परिस्थिति को संभाल लिया। इसी बीच अस्पताल स्टाफ मौका पाकर वहाँ से निकल गया। जैसे ही मामले की जानकारी चर्चा ए आम हुई तो नगर के कथित समाजसेवी मैदान में उतर आए और हुआ वही जो अमूमन होता है। दोनों पक्षों में समझौते के नाम पर ऐसे संस्थानों को फिर से नए कांड को अंजाम देने का लाइसेंस मिल गया, जिससे फिर एक नया समझौता तैयार हो सके, लेकिन इस सब के बीच एक प्रश्न जरूर खड़ा होता है कि पृथ्वी के भगवान के नाम से प्रख्यात ये डॉक्टर्स क्या ऐसे ही बदनाम होता रहेगा? क्या ऐसे ही दो जिंदगियों की कीमत चंद लाख रुपये हो सकती है?  क्या चंद लाख रुपए देकर इस पेशे को बदनाम करने वाले लोग ऐसे ही आरोप मुक्त होते रहेंगे? आखिर कब तक? शासन-प्रशासन ऐसे ही मूकदर्शक बना बैठा रहेगा? कब तक स्वास्थ विभाग ऐसे डॉक्टर्स पर मेहरबान होते रहेंगे?
उक्त प्रकरण में सीएमओ डॉ0 भवतोष शंखधर ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है, यदि संज्ञान में आता है या कोई शिकायत मिलती है तो हम जांच करायेंगे और दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही भी करेंगे।

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