गंगा घाट पर सिंचाई विभाग ने की बड़ी कार्यवाही

गंगा घाट पर सिंचाई विभाग ने की बड़ी कार्यवाही

फूल, प्रसाद की अस्थाई दुकानों को हटवाया
डिबाई/बुलन्दशहर।
कोरोना काल में जहां एक ओर आम जनजीवन स्वास्थ्य को लेकर त्रस्त है, वही ऐसे में छोटे और दैनिक बिक्री के सहारे पलने वाले परिवारों की हालत तो और भी बदतर है। अब इस पर यदि सरकारी डंडा और चल जाए तो फिर ये मान ही लिया जाए कि उनसे तो भगवान ही रुष्ट हैं। ऐसा ही कुछ शुक्रवार को तहसील क्षेत्र डिबाई के नरौरा गंगा घाट पर उस वक्त देखने को मिला ,जब सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ आये विभागीय कर्मचारियों ने नरौरा के गंगा घाट पर छोटे-छोटे खोखों में फूल ,प्रसादी रख कर अपनी जीविका चलाने वालों का सामान उठा कर फेंकना शुरू कर दिया। जब इस सबका स्थानीय लोगांे एवं खोखे वालों ने विरोध करना चाहा तो उनके सामने पुलिस खड़ी हो गयी तो इस तरह कोरोना दंश को झेल रहे अस्थायी पट्टी वालांे पर दो तरफा मार पड़ गयी।
स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ये फड़ तथा खोखे लगाकर जीवन यापन करने वाले छोटे व्यापारी पिछली कई पीढि़यों से फूल ,प्रसादी आदि का व्यापार करते आ रहे हैं, जिसके ऐवज में सिंचाई विभाग ठेका उठाकर टैक्स भी वसूलती आ रही है। परन्तु इस कोरोना काल मे जहां एक ओर सरकार गरीबों एवं छोटे व्यापारों को बचाने का प्रयास कर रही है। वही इस प्रकार की विभागीय कार्यवाही से न सिर्फ अधिकारियों की ,बल्कि प्रदेश शासन की मन स्थिति पर भी सवाल खड़ा कर रही है। इस सम्बंध में जब एसडीओ जुल्फिकार खान से जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि उक्त कार्यवाही अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से की गई है। ये सच है कि विगत वर्षों में गंगा घाट के किनारे के इन स्थानों का ठेका विभाग द्वारा उठाया जाता रहा है। परन्तु वर्तमान में कोरोना संक्रमण फैलने के चलते विभाग ने ये ठेका इस वर्ष नहीं उठाया है। अतः ये सभी अस्थायी रूप से रखे गए खोखे अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं, जिनको हटवाया जाना एक प्रक्रिया के तहत किया गया है। इस सब में एक बात जरूर गौर करने की रही कि जब इन बेसहारा लोगों के रोजी रोजगार को उजाड़ा गया तो खुद को जन सेवक बताने वाले जन प्रतिनिधियों में से कोई भी नेता ,प्रतिनिधि एवं चेयरमैन तक इन लोगों की मदद को सामने नहीं आये। जबकि नरौरा चेयरमैन से लेकर विधायक तक, तमाम मण्डलाध्यक्षों से लेकर सांसद तक, जिलाध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, परन्तु इतने हंगामे के बाद भी कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति सामने नही आया। इस एंगल पर जब जानकारी जुटाई गई तो सूत्रों के हवाले से खबर ये निकली कि कहीं ऐसा तो नहीं कि इन सभी जिम्मेदार पदों पर आसीन लोगों की चुप्पी किसी पावरफुल व्यक्ति के दवाब के चलते हो? क्योंकि यदि ऐसा न होता तो हर छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर उनके समाधान के प्रति जागरूक रहने वाली भाजपा इस मुद्दे पर आखिर कैसे चुप है? अब देखना है कि जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार इस सब के बीच उन गरीब, छोटे एवं दैनिक व्यापारियों को कैसे राहत पहुंचाते हैं?

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