कोरोना संकट में गरीब मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट गहराया

बुलन्दशहर। कोरोना महामारी से जहां एक ओर लोग संक्रमित होते जा रहे है, वहीं गरीब मजदूरों के दो जून की रोटी के लाले पड़ गये है। वे दो वक्त की रोटी के लिये इधर उधर भटकने पर मजबूर हो गये है।मगर स्थिति इतनी भयावह हो गयी है कि लॉकडाउन काल में वे काम पर भी नहीं जा सकते। सबसे बड़ी समस्या प्रवासी मजदूरों के सामने है, जहां उनके पास अब रोजी-रोटी का भी संकट है।दो जून की रोटी के लिये जनपद भर में विभिन्न स्थानों पर खड़े होने वाले मजदूर सुबह रोजी रोटी की तलाश में आते हैं, मगर काम न मिलने के कारण वह मायूस होकर लौट जाते हैं। बता दें कि जिले में दूसरे राज्यों और जिलों से करीब पांच हजार से अधिक प्रवासी मजदूर आए हैं, वह भी रोजी-रोटी कमाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। साथ ही बताया जाता है कि गरीब मजदूरों के उत्थान के लिए सरकार की योजनाएं सरकारी कार्यालयों में दम तोड़  रही हैं। नगर क्षेत्र के चौराहों पर एंव नुमाईश मैदान में सुबह के समय रोजी-रोटी की तलाश में न जाने कितने मजदूर खड़े रहते हैं। विगत दो सालों में कोराना संक्रमण महामारी ने गरीब मजदूरों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। रोजी-रोटी की तलाश में मजदूर इधर-उधर भटक रहे हैं। बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूर भी कोरोना संकट से जूझ रहे हैं। गांवों में भी रोजगार के संसाधन नहीं हैं। मनरेगा योजना में भी मजदूरी केवल 201 रुपये है तो इससे काफी श्रमिक मजदूर पहले से ही जुड़े हुए हैं।

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