कोरोना महामारी में शमशान घाट में नहीं है चिता जलाने की जगह

कोरोना महामारी में शमशान घाट में नहीं है चिता जलाने की जगह

बुलन्दशहर।शनिवार को देश में कोरोना की दूसरी लहर ने सब कुछ तबाह कर दिया। दिन पर दिन कोरोना की संख्या बढ़ रही है। मृत्यु भी दिन प्रतिदिन अधिक हो रही है। ऐसा भी दिन आएगा ,जब अस्पताल ही नहीं बल्कि शमशान घाट में भी अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ेगा। वर्तमान की यही हकीकत है। कोरोना संक्रमण के बीच मौतों का सिलसिला बढ़ने से अब शमशान घाट भी फुल हो गए हैं। जब शमशान घाट पर नौ प्लेटफार्म भर गए तो मजबूरी में दो शवों का अंतिम संस्कार जमीन पर खुले में ही कराना पड़ा। कोरोना संक्रमण जिले में काफी खतरनाक स्थिति में है। सरकारी आंकड़ों में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 102 है जबकि मृतकों की संख्या 110 बताई जा रही है। जिले से बाहर यदि मौत हो रही है तो कोविड-19 के पोर्टल पर भी संख्या आसानी से अपडेट नहीं हो पा रही है। इसके चलते मौत के आंकड़े गड़बड़ आ रहे हैं। 4घंटे में काली नदी के निकट स्थित शमशान घाट पर गुरुवार को आठ चिता जलाई गई ,जबकि शुक्रवार को शाम तक शमशान घाट में 10शवों का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार कराने आए लोगों के साथ वहां मौजूद सेवादार, शमशान घाट कमेटी से जुड़े हितेश गर्ग ,अनिल भारद्वाज ,प्रदीप अग्रवाल ,टीकाराम सिंघल ,योगेश गुप्ता ,पवन गोयल ,राजेंद्र अग्रवाल आदि की आंखें नम हो गई। कमेटी अध्यक्ष हितेश गर्ग ने बताया कि पिछले 10 सालों में पहली बार ऐसी स्थिति में यह देखने को मिला, जब गुरुवार को अधिक शव आने के कारण प्लेटफार्म से बाहर जमीन पर एक शव का अंतिम संस्कार करके आना पड़ा।

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