कांग्रेस को फिर मिला राफेल का सहारा,बिचौलिए को लेकर मोदी सरकार पर हमला

कांग्रेस को फिर मिला राफेल का सहारा,बिचौलिए को लेकर मोदी सरकार पर हमला

राफेल लड़ाकू विमान सौंदे में भ्रष्टाचार की आशंका
पूरी तरह से निराधार है कांग्रेस मुद्दा-भाजपा

नई दिल्ली। राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार के कथित आरोपों को भाजपा ने सोमवार को ‘‘पूरी तरह निराधार’’ करार दिया, साथ ही पार्टी ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि उच्चतम न्यायालय ने भी इस मामले की जांच कराने संबंधी मांग को खारिज कर दिया था और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इसमें कुछ गलत नहीं पाया था। राफेल विमान खरीद में भ्रष्टाचार के कांग्रेस के आरोपों के संबंध में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विपक्षी दल ने साल, 2019 के लोकसभा चुनाव में भी इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था ,लेकिन उसे करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप ‘‘पूरी तरह निराधार’’ है और दावा किया कि इस खरीद में वित्तीय अनियमितताओं संबंधी फ्रांस की मीडिया में छपी खबरें उस देश में ‘‘व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता’’ के चलते हो सकती है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कांग्रेस ने इस मामले को पूर्व में भी उठाया है और उच्चतम न्यायालय में भी उसकी हार हुई। यहां तक कि कैग जांच में कुछ गलत नहीं पाया गया। ज्ञात हो कि कांग्रेस ने राफेल सौदे में एक बिचौलिये को 11 लाख यूरो (करीब 9.5 करोड़ रुपये) का भुगतान किए जाने के दावे संबंधी फ्रांसीसी मीडिया की एक खबर का हवाला देते हुए सोमवार को इस विमान सौदे की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की थी। प्रसाद ने कहा, ‘‘कांग्रेस राफेल मामले को फिर उठा रही है। उच्चतम न्यायालय में उसे हार का सामना करना पड़ा था। साल, 2019 के लोकसभा चुनाव में राफेल मुद्दे पर उसने प्रचार किया और प्रधानमंत्री पर सभी प्रकार के आरोप लगाए ,लेकिन इसके बावजूद हार का सामना करना पड़ा। उन्हें कितनी सीटें मिली थी, याद है ना।’’ वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि फ्रांस की मीडिया की खबर में मध्यस्थ के रूप में जिस सुशेन गुप्ता का नाम आया है, वह साल 2019 में अगस्ता वेस्टलैंड मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि इस जांच में कई कांग्रेस नेताओं के नाम भी उछले थे। प्रसाद ने कांग्रेस पर सुरक्षा बलों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
फ्रांस की मीडिया के एक खबर में दावा किया गया है कि इस करार के लिए विमान निर्माता कंपनी ने एक ‘‘दलाल’’ को 11 लाख यूरो दिए। प्रसाद ने कहा कि 30सालों के बाद भारतीय वायु सेना को राफेल लड़ाकू विमान मिले हैं। उन्होंने कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय यदि राफेल होता तो भारतीय लड़ाकू विमानों को सीमा पार नहीं करना होता।
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को लेकर सवाल उठाए जाने पर प्रसाद ने कहा कि भारत अब पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को उनके ‘‘गैर जिम्मेदाराना’’ बयानों के मद्देनजर गंभीरता से नहीं ले रहा है। गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान की सही तरीके से तैयारी नहीं की गई और इसका क्रियान्वयन भी ‘अयोग्यता पूर्वक’ किया गया। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हमारे जवानों को जब चाहे तब शहीद होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।’’ गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर शनिवार को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बल के 22 जवान शहीद हो गए तथा 31 अन्य जवान घायल हुए हैं।
फिर सवालों के घेरे में राफेल डील
हालांकि रिपोर्ट में जिस भारतीय कंपनी का नाम सामने आया है वो पहले भी काफी विवादों में रही है। बता दें कि जब साल, 2016 में भारत सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की डील की थी, तब भी विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया था और इस डील में बड़ी गड़बड़ी की बात कही थी, लेकिन तब सरकार का कहना था कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए राफेल को निशाने पर लिया जा रहा है। खासकर कांग्रेस में राफेल डील को लोकसभा चुनाव, 2019 में मुख्य मुद्दा बनाया था। बता दें कि भारत को साल ,2022 में सारे राफेल मिल जाएंगे।दसॉल्ट ग्रुप के अकाउंट से ट्रांसफर हुए 10लाख यूरो
फ्रांसीसी मीडिया की खबर के मुताबिक इसका खुलासा तब हुआ जब राफेल की डील पर साइन हो चुके थे और फ्रांस की एंटी करप्शन एजेंसी एएफए ने पाया कि दसॉल्ट ग्रुप के अकाउंट से 10 लाख यूरो ‘गिफ्ट टू क्लाइंट्स’ के तौर पर ट्रांसफर हुए थे जो भारत मे किसी को दिए गए। दसॉल्ट ग्रुप ने अपनी सफाई में कहा था कि इन पैसों का इस्तेमाल राफेल लड़ाकू विमान के 50 बड़े श्मॉडलश् बनाने में हुआ था लेकिन अभी तक ऐसा कोई मॉडल बना ही नहीं। हालांकि एएफए ने इस मामले को अभी प्रोसिक्यूटर के हवाले नहीं किया है। यह राशि तब ट्रांसफर हुई जब राफेल की डील पर साइन हो गए थे। फ्रांसीसी रिपोर्ट का दावा है कि अक्तूबर ,2018 में फ्रांस की पब्लिक प्रोसिक्यूशन एजेंसी पीएलएफ को राफेल सौदे में गड़बड़ी के लिए अलर्ट मिला था। तभी ऑडिट करवाया गया और यह ‘गिफ्ट टू क्लाइंट्स’ की बात सामने आई। हालांकि दसॉल्ट ग्रुप के पास इन आरोपों का कोई जवाब नहीं था और न ही वो यह बता पाई कि इतनी राशि किसको दी गई है।

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