ऑक्सीजन की होती किल्लत से संक्रमण होता बेकाबू

ऑक्सीजन की होती किल्लत से संक्रमण होता बेकाबू

बुलन्दशहर। देशभर में कोरोना वायरस बड़ी ही तेजी के साथ लोगों को संक्रमित कर रहा है, लेकिन इस बार देश सिर्फ इस वायरस की वजह से परेशान नहीं है, बल्कि इस बार ऑक्सीजन की कमी भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों को अस्पताल में बैड नहीं मिल पा रहे हैं और जिन्हें बैड मिल भी रहे तो उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है, लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर जो ऑक्सीजन हमारे वातावरण में है, वो सिलेंडर के अंदर कहां से आती है? इसे तैयार कौन करता है और कैसे होती है? हमारे वातावरण में काफी ऑक्सीजन है। आपको बताते हैं कि आखिर सिलेंडर के अंदर ऑक्सीजन कहां से आती है? यहां गैस क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस के जरिए ऑक्सीजन बनती है। इस प्रक्रिया में हवा को फिस्टर किया जाता है, ऐसा करने से धूल-मिट्टी इससे अलग हो जाती है। इसके बाद कई चरणों में हवा को कंप्रेस यानी उस पर भारी दबाव डाला जाता है, अब जरा सोचिए जिस ऑक्सीजन को बनाने में हवा की जरूरत लेनी पडे़, तो हवा भी शुद्ध चाहिए ,उसके लिए जरूरी है कि हम हवा प्रदूषण पर रोक लगाए, वरना आज जिस हवा से हम ऑक्सीजन बनाते जा रहे है, कल वो हवा ऑक्सीजन बनाने के लायक नहीं रहेगी, वहीं अगर पेड़ो की बात करें तो एक स्वस्थ पेड़ हर दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सात लोगों को प्राण वायु मिल पाती है। यदि इसके आसपास कचरा जलाते हैं तो इसकी ऑक्सीजन उत्सर्जित करने की क्षमता आधी हो जाती। इस तरह हम तीन लोगों से उसकी जिंदगी छीन लेते हैं। आज की कटाई पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है, इसलिए पौधे लगाने के साथ-साथ हमें उन्हें बचाने की जरूरत है। इसके लिए हमें जागरूक होने की जरूरत है। अपने आसपास पेड़ों को न कटने दें ,उसका विरोध करें। उसके आसपास आग न लगाएं।

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