एएसपी ने सम्राट अशोक जयंती पर सबको बधाई दी

एएसपी ने सम्राट अशोक जयंती पर सबको बधाई दी

सम्राट अशोक के अभिलेखों से हमें सीख लेनी चाहिए
बुलन्दशहर।
डॉ0 बीपी अशोक ,एएसपी ने कहा कि सबसे पहले मैं धन्यवाद देना चाहुंगा अपने पिता डॉ0 देवी सिंह अशोक को ,जिन्होंने सम्राट अशोक से प्रेरित होकर अशोक उपनाम दिया। शायद मैं स्वयं इससे बेहतर कोई उपनाम नहीं चुन सकता था। जब मैं मेरठ कॉलेज में बीए में पढ़ रहा था और कुमार आश्रम में रह रहा था तो इतिहास की पुस्तकों में सम्राट अशोक के अभिलेखों का अध्ययन किया और जब अशोक के अभिलेखों में जनता की हर समस्या को हर समय सुनने और उन्हें हल करने का आदेश पढ़ा तो यकीन मानिये मेरे व्यक्तित्व ने ठान लिया कि जब भी प्रशासनिक नौकरी करुंगा तो इस तरह करुंगा कि लोगों को व्यवहार में अशोक की प्रासंगिकता दिखाई देगी। सन 1985 में पिताजी फतेहगढ़ में तैनात थे तो मैने अशोक के अभिलेख उनके कार्यालय में लगवाये ,जिनका असर समाज के सशक्तिकरण पर बहुत ज्यादा पड़ा। फिर एक दिन आया कि मुझे क्षेत्राधिकारी नगर रामपुर की तैनाती मिली और मैने अशोक के दो प्रशासनिक अभिलेख अपनी कुर्सी के पीछे लगवाये ,जिन पर बुद्ध, अशोक, अकबर, गांधीजी और बाबा साहेब की फोटो भी लगी थी। बाद में चाहे मैं क्षेत्राधिकारी हजरतगंज रहा, चाहे पुलिस अधीक्षक नगर लखनऊ, आगरा या मेरठ ,सभी जगह अशोक के अभिलेख मेरे कुर्सी पर बैठते ही लग जाते थे। इन अभिलेखों का असर मुझ पर इस कदर रहा कि मैंने जनता की समस्या सुनने में कभी थकान का अहसास नहीं किया, न ही कभी रूखेपन, क्रोध या अरूचि दिखाई। यह कल्याण का कार्य मुझे ऊर्जा देने लगा और जनता ने उन्हें पढ़कर सदैव समानुभूति और सशक्तिकरण का अहसास किया और अशोक का वाक्य संयम और आत्मपरीक्षण का आदेश मेरे कानों में सदैव गूँजता है। अशोक के अभिलेख सही मायने में सभी कार्यालयों में अनिवार्य रूप से लगे होने चाहिए, ताकि जनता के लोग कार्यालय में प्रवेश करते ही सशक्तिकरण और शक्ति के गलियारे में हिस्सेदारी का अहसास कर सकें और अधिकारी स्वयं को लोकसेवक समझें ,यही सम्राट अशोक को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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