आमजन ने सीख लिया बंदिशों में जीना

आमजन ने सीख लिया बंदिशों में जीना

बुलन्दशहर। जब से देश में कोरोना कहर बरपा है, तब से अब तक जनमानस ने कोरोना काल की बंदिशों में जीना सीख लिया है। लोगों ने आम दिनों की चर्चा को भुला दिया है और कोविड गाइडलाइन के मुताबिक नियमों के पालन करने में ढल चुके हैं। इसका नतीजा चौराहों और सड़कों पर देखने का मिल रहा है, जहां अब पुलिस नदारद है और वाहनों की आवाजाही ही नहीं है। दिन भर चौराहा ,सड़कें सूनी रही। सोमवार की सुबह करीब 9बजे तक सड़कों पर दो चार वाहन दिखे, लेकिन इसके बाद नगर की सड़कें वीरान हो गई। दूर-दूर तक नजर दौड़ाने पर भी नगर में न तो कोई व्यक्ति और न ही कोई वाहन दिखा। आमजन घरों में कैद रहे। हालांकि कुछ रिक्शा चालकों ने दो जून की रोटी का इंतजाम करने के लिए रिक्शा चलाने का प्रयास किया, लेकिन यह भी सड़क किनारे खड़े होकर सवारियों का इंतजार करते रहे, निराशा हाथ तब लगी, जब उन्हें सड़कों पर रिक्शा में बैठने के लिये कोई सवारी तक नहीं मिली और वे रिक्शाओं को पेड़ के नीचे खड़े कर आराम करते नजर आए। देहात क्षेत्र से दूध लेकर आने वाले दूधियाओं ने भी सुबह 8बजे तक आपूर्ति की और गांव की ओर रवाना हो गए। सुबह शाम सब्जी और फलों के ठेले वाले सड़कों पर दिखे ,लेकिन ग्राहकों के न होने पर उन्हें निराशा हाथ लगी। यहां तक कि व्यापारी भी अब टीवी देखकर परिवार के साथ गुजार रहे हैं ।नौकरी पेशा युवा सुबह से शाम तक घरों में कैद रहकर टीवी देख कर या मोबाइल पर ही नजर आते हैं। यहां तक कि यदि घर में पांच सदस्य है तो सभी अपने अपने मोबाइल पर ही चिपके रहते है।इसके साथ-साथ हाथों को सेनिटाइज करने का सिलसिला जारी रहा है। युवा और महिलाएं परिवार के साथ समय पूजा करती नजर आईं और बच्चों के लिए यह खाली समय भारी रहा,क्यांेंकि अब वे बाहर खेलने नहीं जा सकते।

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