आनंदा डेयरी ने पौधे लगाकर दिया पर्यावरण बचाने का संदेश

आनंदा डेयरी ने पौधे लगाकर दिया पर्यावरण बचाने का संदेश

पेड़-पौधे जीवंत शक्ति से भरपूर, प्रकृति के अनुपम उपहार हैं
स्याना/बुलन्दशहर।
बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने के लिए वृक्षारोपण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। आनन्दा के चेयरमैन राधेश्याम दीक्षित ने विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की थी। 5जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। विश्व पर्यावरण दिवस पर आनंदा डेयरी ने सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के पिलखुआ, हापुड़ फैक्ट्री एवं ग्रामीण क्षेत्र में संचालित दुग्ध अवशीतन केन्द्रों पर वन विभाग के सहयोग से जगह जगह 5000 पौधे से अधिक गॉव तक पहुँचाकर वृक्षारोपण कर जागरूक किया, साथ ही पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया। पर्यावरण दिवस की शुरुआत आनंदा डेयरी के राहुल दीक्षित डायेरक्टर ने स्याना में पौधरोपण करके की। वही कम्पनी के चेयरमैन राधे श्याम दीक्षित ने कहा कि पर्यावरण पर बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले हमें कुछ आदतें अपनाना होंगी व उनका पालन करना होगा, क्योंकि स्थितियां बदलने की सबसे अच्छी शुरुआत स्वयं से होती है। उन्होंने आगे ये भी कहा कि की पेड़-पौधे जीवंत शक्ति से भरपूर प्रकृति के ऐसे अनुपम उपहार हैं ,जो सभी को प्राणवायु ऑक्सीजन तो देते ही हैं, पर्यावरण को भी शुद्ध और संतुलित रखते हैं। इतना ही नहीं वास्तुदोष निवारण में,बीमारियों को ठीक करने में एवं उत्तम स्वास्थ्य संरक्षण में वृक्ष-वनस्पतियों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं।साथ ही कहा कि बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए वृक्षारोपण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है, इन्हें लगाना हमारे लिए हर हाल में लाभकारी हैं। पेड़ों द्वारा बनाने वाली ऑक्सीजन के कारण ही हम जिंदा रहते हैं। भारत में इस समय कोरोना महामारी का कहर जारी है। ऑक्सीजन की कमी कई मरीजों की मौत की वजह बन रही है। ऐसे हालातों में सभी को ये बात समझनी चाहिए कि पर्यावरण का संरक्षण ही हमारे जीवन का सुरक्षा कवच है। पर्यावरण दिवस के मौके पर हमें पर्यावरण की सुरक्षा और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लेना चाहिए और आनंदा परिवार इसके लिये वचनबद्ध है। घर के आसपास पौधारोपण करें। इससे आप गर्मी, भूरक्षण, धूल इत्यादि से बचाव तो कर ही सकते हैं, पक्षियों को बसेरा भी दे सकते हैं, फूल वाले पौधों से आप अनेक कीट-पतंगों को आश्रय व भोजन दे सकते हैं।

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