आखिर क्या है डिबाई थाने का संकट! आर्थिक तंगी या लापरवाही?

आखिर क्या है डिबाई थाने का संकट! आर्थिक तंगी या लापरवाही?

विद्युत विभाग का मोहताज बना डिबाई थाना
बिजली की कटौती पर थम जाते है कम्यूटर एवं अन्य उपकरण
डिबाई/बुलन्दशहर।
समूचे प्रदेश के थानों के अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होने के दावों की कलई खोल रहा है डिबाई थाना। कहने को तो डिबाई थाना, सर्किल का मुख्य थाना है। जोकि अधिकारियों के आवागमन के लिए पहले से चर्चित है, लेकिन इसके असल में क्या हालत है? इसका अंदाजा आप इससे ही लगा सकते हैं कि जिस वक्त विद्युत विभाग रुष्ट हो जाये तो समझ लीजिए कि थाने की बत्ती गुल… अर्थात जब तक बिजली के तारों में करंट दौड़ेगा ,तब तक डिबाई थाने में लगे बिजली के पंखों में तथा कम्प्यूटरों में करंट रहेगा। जबकि डिबाई थाने के लगभग हर कमरे में आवश्यकतानुसार इन्वर्टर ही नही बल्कि असमय बिजली की कटौती होने पर पूरे थाने के लिए जेनरेटर भी मौजूद है। परन्तु जब बिजली चली जाती है तो वो सब सफेद हाथी की तरह खड़ा नजर आता है। इसका जीता जगता प्रमाण उस वक्त मिला जब मंगलवार को दिन में लगभग 4.30 बजे बिजली जाने के बाद डिबाई थाने के न सिर्फ पंखों की रफ्तार थम गई बल्कि थाने की सबसे महत्वपूर्ण मशीनरी यानी कम्प्यूटर तक अंधे हो गए। जब इस संदर्भ में जानकारी जुटाई गई तो ज्ञात हुआ कि जेनरेटर में ईंधन की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इसी के साथ इन्वर्टर भी फेल है क्योंकि चार्ज नहीं हैं तो अब प्रश्न ये उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश का पुलिस विभाग इस वक्त आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है या सिस्टम की लापरवाही ? क्या इस सब की प्रॉपर जानकारी सक्षम हुक्मरानों को मिल भी रही है या नही? यदि नहीं तो क्यों? यदि सिपाहियों को हथियार तो अत्याधुनिक दे दिए जाएं लेकिन उनको बिना कार्टेज दिए मुठभेड़ के लिए भेज दिया जाए तो क्या ये किसी मजाक से कम नही होगा? आखिर ऐसी क्या वजह है?जो स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इस ओर से आँखें मूद रखी है या इन अधिकारियों की कोई सुनता नहीं। ज्ञात हो कि तहसील पर मौजूद उपाधीक्षक डिबाई वन्दना शर्मा अक्सर मुकदमों की जानकारी जुटाने तथा विभागीय कामों के लिए अक्सर थाने में देखी जाती हैं। परन्तु उनकी इस उदासीनता की वजह से, कभी किसी समय में आदर्श थाना कहलाये जाने वाली कोतवाली डिबाई आज पुलिस विभाग का मजाक उड़ा रहा है। मंगलवार को दिन में कम्यूटर बंद होने के चलते तमाम मुंशी एवं हेड मोहर्रिर लाचार दिखे। पंखे बंद, कंप्यूटर बंद….अब देखना ये होगा कि कब तक इस तरह से डिबाई थाना चलता रहेगा? थाना और कितने दिन अपनी लाचारी और बेकद्री पर ऐसे ही खून के आँसू बहाता दिखेगा। आखिर कब तक अधिकारियों के आने पर उनको वीआईपी ट्रीटमेंट देने वाले अधिकारीगण अपनी कर्म भूमि के प्रति संजीदा होंगे? क्योंकि यदि थोड़ा फ्लैशबैक में जाएं तो डिबाई थाने का जो नजारा अभी कुछ दिन पूर्व में था वो निश्चित ही सराहनीय था। ज्ञात हो कि विगत वर्ष में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अखिलेश गौड़ के समय से शुरू हुए डिबाई थाना सौंदर्यकरण अभियान को बखूबी ढंग से सफल बनाने की मुख्य भूमिका में रहे एसएसआई भंवर पाल सिंह को लोग आज भी याद करते हैं। जिस थाने के ऑफिस एवं अन्य कमरों में बरसात के दिनों में लगभग 1 फुट तक पानी भर जाता था, वही थाना उनके कार्यकाल तक देखने-दिखाने लायक हो गया था। समरसिबिल से लेकर लाइट तक, जेनरेटर दे लेकर इन्वर्टर एवं ए0सी0 तक सभी आधुनिक व्यवस्थाओं से युक्त थाना बनाने में भंवर पाल सिंह ने बहुत अहम भूमिका अदा की है, लेकिन आज थाने में इन्वर्टर फेल होने से लेकर जेनरेटर के नहीं चलने पर जो सवाल उठ रहे हैं वो डिबाई के साथ-साथ जिला पुलिस की किरकिरी करने के लिए पर्याप्त है।

 154 total views,  2 views today

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *